- 246.75 मेट्रिक टन घोटाले पर गरमाई राजनीति
- किसानों की खाद पर किसका कब्जा? गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने खोला मोर्चा
- गोदाम खाली, किसान परेशान और अब खुल रहा खाद घोटाले का राज
- खाद घोटाले में नए नामों की चर्चा,कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल
- 246.75 मेट्रिक टन खाद का खेलः किसान लाइन में…बिचौलियों के गोदाम फुल!
- खाद घोटाले पर राजनीतिक संग्राम : दोषियों पर कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
- किसानों का हक कौन खा गया? खाद घोटाले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां, 29 मई 2026 (घटती-घटना)। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने जिल्दा सहकारी समिति में सामने आए 246.75 मेट्रिक टन खाद घोटाले को लेकर अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है,पार्टी के पदाधिकारी पोड़ी बचरा चौकी पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की,जिस खाद को किसानों के खेतों तक पहुंचना था,वह अब राजनीतिक गलियारों और पुलिस जांच के बीच घूमती दिखाई दे रही है,ग्रामीणों का आरोप है कि किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिली,लेकिन गोदामों से खाद रहस्यमयी तरीके से गायब होती रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसानों के हिस्से की खाद किन लोगों के घर और गोदाम तक पहुंची?
यह घोटाला नहीं,किसानों के अधिकारों की लूट
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि खाद की अवैध खरीदी-बिक्री कर लाखों रुपये का खेल किया गया है, पार्टी का कहना है कि यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है, पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि समिति में खाद वितरण के नाम पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई,जिन किसानों को खाद मिलनी चाहिए थी,वे लाइन में खड़े रहे और दूसरी तरफ कथित रूप से बिचौलियों और रसूखदार लोगों तक खाद पहुंचती रही, व्यंग्यात्मक अंदाज में ग्रामीण अब कह रहे हैं कि खाद खेत में कम और सेटिंग में ज्यादा इस्तेमाल हुई।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की प्रमुख मांगें…
पूरे खाद घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए…
दोषी अधिकारियों,कर्मचारियों और बिचौलियों पर एफआईआर दर्ज हो…
अवैध तरीके से खाद खरीदने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाए…
किसानों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए…
पूरे मामले की जांच सार्वजनिक रूप से पारदर्शी तरीके से हो…
दोषियों को बचाने की कोशिश?
शिकायत पत्र में समिति अध्यक्ष,प्रबंधक और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है,पार्टी नेताओं का आरोप है कि पूरे मामले में कई लोगों की मिलीभगत सामने आ रही है,लेकिन कार्रवाई कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रखी जा रही है,ग्रामीणों और किसानों के बीच यह चर्चा तेज है कि जिन लोगों के पास से खाद बरामद हुई या जिनके नाम सामने आए, उन पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन बड़े नामों तक पहुंचने से बच रहा है? क्या राजनीतिक दबाव जांच की दिशा तय कर रहा है? यही सवाल अब गांव-गांव में चर्चा का विषय बन गए हैं।
पुलिस जांच से बढ़ा दबाव
बताया जा रहा है कि पुलिस पहले से खाद स्टॉक,वितरण रजिस्टर और खरीदी-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है,लेकिन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता के बाद अब प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है,पार्टी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा,उनका कहना है कि किसानों के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों में गुस्सा,किसानों में अविश्वास
ग्रामीणों का कहना है कि जब खेती का समय था तब उन्हें खाद के लिए चक्कर लगवाए गए,कई किसानों को यह कहकर लौटा दिया गया कि स्टॉक खत्म हो गया है,लेकिन अब जब हजारों बोरी खाद के गायब होने की बात सामने आ रही है तो लोगों का भरोसा सहकारी व्यवस्था पर कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है,किसानों का आरोप है कि यदि समय पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में भी इसी तरह खाद,बीज और अन्य कृषि सामग्री में भ्रष्टाचार जारी रहेगा।
अब प्रशासन की परीक्षा
246.75 मेट्रिक टन खाद घोटाला अब केवल सहकारी समिति तक सीमित मामला नहीं रह गया है, यह किसानों के भरोसे, प्रशासन की निष्पक्षता और राजनीतिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है, अब देखना यह होगा कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या सच में उन लोगों तक पहुंचती है जिनके संरक्षण में किसानों की खाद गायब होती रही, फिलहाल गांवों में एक ही चर्चा है अगर किसानों की खाद भी सुरक्षित नहीं, तो फिर सहकारी व्यवस्था आखिर किसके लिए चल रही है?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur