दूसरे राज्यों के खातों में आरटीजीएस कर पैसे ट्रांसफर,फर्जी फाइनेंशियल-ऑफिसर के चक्कर में फंसी
बिलासपुर,27 मई 2026। बिलासपुर में स्टेट बैंक के रिकॉर्ड और खातों में छेड़छाड़ कर 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार रुपए गबन करने वाली कैशियर तेजवथ थीरापतम्मा के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दिया है। जिसमें उन्हें बैंक के ग्राहकों के खातों में जमा रुपए और बैंक के बही खातों में हेराफेरी कर गबन करने के लिए दोषी माना गया है। चार्जशीट में जांच एजेंसी ने बताया कि, आरोपी ने महज 14 दिन में बैंक के इंटरनल सिस्टम में फर्जी एंट्री कर करोड़ों रुपए थर्ड पार्टी खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामले में बाकी संदिग्धों और सह-आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। दरअसल,पूरा मामला बिलासपुर जिले के बिल्हा स्थित एसबीआई शाखा का है। यहां 19 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 के बीच महज 15 दिनों में 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार 600 रुपए रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। जब शाखा प्रबंधक पीयूष बारा को इसकी भनक लगी, तब उन्होंने इसकी विभागीय जांच की। जांच में पता चला कि कैशियर तेजवथ थीरापतम्मा पर बैंक के कैश की देखरेख की जिम्मेदारी थी,जिन्होंने इतनी बड़ी रकम का गबन किया है।
दूसरे राज्यों के बैंक अकाउंट में की आरटीजीएस : एसीबी जांच में सामने आया कि, आरोपी महिला अधिकारी ने 19 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 के बीच बैंक के इंटरनल और बीजीएल खातों में फर्जी और झूठी एंट्री की। इसके जरिए 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार 600 रुपए आरटीजीएस से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि,सरकारी और लोकधन की इस हेराफेरी को छिपाने के लिए बैंक से जुड़ी सेवाओं, भोजन-पेय और संपत्ति रखरखाव के नाम पर फर्जी खर्च भी दर्ज किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ खाताधारकों के बैंक खातों का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी को पता चला है कि आरोपी ने दूसरे राज्यों के बैंक अकाउंट्स में आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर की है। एजेंसी को थर्ड पार्टी खातों और कुछ अन्य लोगों की मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं। इसी वजह से मामले की विवेचना अभी जारी रखी गई है।
ब्रांच मैनेजर की
शिकायत से खुला मामला
घोटाले का खुलासा एसबीआई बिल्हा शाखा के ब्रांच मैनेजर की लिखित शिकायत के बाद हुआ। इसके आधार पर 19 जनवरी 2025 को रायपुर स्थित मुख्यालय ईओडब्ल्यू और एसीबी में केस दर्ज किया गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए),13(2) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है।
कई और गिरफ्तारियों के संकेत
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक मुख्य आरोपी के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है,लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है। थर्ड पार्टी खातों में रकम ट्रांसफर होने और अन्य लोगों की भूमिका के सबूत मिलने के बाद एजेंसी अब सह-आरोपियों की कड़ी तलाश में जुटी है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
साइबर फ्रॉड की शिकार हुई कैशियर,
कमाई की लालच में उड़ाए रकम
शाखा प्रबंधक पीयूष बारा ने इस मामले की शिकायत एसीबी में की,तब मामले में भ्रष्टाचार और शासकीय जमा राशि की हेराफेरी का केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। इस मामले में कैशियर तेजवथ थीरापतम्मा 8 महीने तक फरार चल रही थी। शुरूआती जांच में आरोपी ने रखरखाव में खर्च करने की बात कही। केवल रखरखाव में इतनी बड़ी रकम खर्च करने और बैंक में जमा राशि को उनके द्वारा निजी खातों में ट्रांसफर करने के सवाल पर कैशियर गोलमोल जवाब देने लगी। एसीबी की पूछताछ में कैशियर ने बताया कि उनके मोबाइल पर टेलीग्राम पर फाइनेंशियल ऑफिसर के नाम पर मेसेज आया था,जिसमें रकम इन्वेस्ट करने पर 2 गुना फायदा होने का दावा किया गया। इस लालच में आकर कैशियर ने बैंक की जमा राशि को कथित फाइनेंशियल ऑफिसर के बताए अकाउंट नंबर पर ट्रांसफर करती रहीं।
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