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खड़गवां@ सुपोषण का सपना,भूखे कर्मचारियों के सहारे?

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मानदेय नहीं मिलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा
महिला एवं बाल विकास विभाग में बढ़ा असंतोष
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,26 मई 2026 (घटती-घटना)।
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना मनेंद्रगढ़ में इन दिनों भारी नाराजगी का माहौल है,लंबे समय से मानदेय भुगतान नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं आर्थिक संकट से जूझ रही हैं,नाराज कार्यकर्ताओं ने परियोजना अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे शासन के सुपोषण चौपाल कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगी।
बिना वेतन कितना काम करें?- आवेदन में कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार चलाने तक की समस्या खड़ी हो गई है,रोजमर्रा के खर्च,बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, लेकिन जब मेहनताना ही समय पर नहीं मिले तो काम करने का उत्साह भी खत्म होने लगता है।
बिजली बिल तक जमा करने में परेशानी- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि कई कर्मचारियों के बिजली बिल तक जमा नहीं हो पा रहे हैं, स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि कुछ के घरों की बिजली कटने की नौबत आ चुकी है, व्यंग्य यह है कि एक तरफ सरकार ‘सुपोषण’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं योजनाओं को जमीन पर लागू करने वाली महिलाएं आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं।
सुपोषण चौपाल के बहिष्कार की चेतावनी- कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने स्पष्ट कहा है कि लगातार उपेक्षा के कारण अब वे आगामी सुपोषण चौपाल कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी, आवेदन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हस्ताक्षर शामिल हैं, जिससे साफ है कि मामला व्यापक असंतोष का रूप ले चुका है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल- इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, सरकार जहां महिला एवं बाल विकास योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं उन्हीं योजनाओं को संचालित करने वाले कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं मिलना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है, यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका सीधा असर विभागीय कार्यक्रमों और सरकारी अभियानों पर पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।


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