- राजपुर स्वास्थ्य केंद्र उन्नयन की फाइल दबाकर RTI तक का नहीं दिया जवाब, सूचना आयोग से लेकर न्यायालय तक जाने की चेतावनी
रायपुर/बलरामपुर,26 मई 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश सरकार एक ओर “विष्णु का सुशासन” और “विकसित छत्तीसगढ़” जैसे नारों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नयन करने की मांग को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब तक नहीं दिए जाने से मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन के सरगुजा संभाग अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ राजपुर के प्रवक्ता एवं संचार टुडे CGMP न्यूज के स्टेट हेड अभिषेक कुमार सोनी ने मुख्यमंत्री को “अंतिम स्मरण पत्र” भेजते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग और सक्षम न्यायालय की शरण ली जाएगी।
मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अभिषेक कुमार सोनी ने बताया कि राजपुर क्षेत्र की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और लगातार बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नयन करने की मांग की थी। इस आवेदन पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने 03 अप्रैल 2026 को आदेश क्रमांक 2500726009952/मु.मं.नि./2026 जारी कर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। आवेदक द्वारा लगातार ईमेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से दो बार स्मरण पत्र भेजे जाने के बाद भी विभाग की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया और न ही कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की गई।
इस मामले में मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर, सरगुजा संभाग आयुक्त, कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित विभिन्न पत्रकार संगठनों और संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
RTI में सामने आई स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल बलरामपुर में अब तक ICU, HDU, NICU और PICU जैसी अत्यावश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। पिछले तीन वर्षों में हजारों मरीजों को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा।
वहीं राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के अधिकांश पद रिक्त बताए गए हैं। सर्जरी, मेडिसिन, स्त्री रोग, शिशु रोग और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के कारण गंभीर मरीजों को अंबिकापुर रेफर करना पड़ता है।
आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र की जनता सबसे ज्यादा प्रभावित
राजपुर क्षेत्र आदिवासी और वनांचल क्षेत्र है, जहां हजारों ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों के लोग इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। लेकिन पर्याप्त डॉक्टर, जांच सुविधाएं और आधुनिक संसाधनों के अभाव में मरीजों को लंबी दूरी तय कर अंबिकापुर जाना पड़ता है। कई बार रास्ते की कठिन परिस्थितियों और इलाज में देरी के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजपुर स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अथवा उप जिला चिकित्सालय में उन्नत किया जाता है तो क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी और गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।
RTI का जवाब नहीं, विभागीय चुप्पी पर उठे सवाल
अभिषेक कुमार सोनी ने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी भी निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई, जो पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना के विपरीत है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
मुख्यमंत्री सचिवालय के आदेश पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए,
राजपुर स्वास्थ्य केंद्र उन्नयन प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए,
विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी दी जाए,
स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र सिविल/उप जिला चिकित्सालय में उन्नत किया जाए,
लंबित RTI आवेदन का जवाब तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
“क्या सुशासन सिर्फ नारों तक सीमित?”
अभिषेक कुमार सोनी ने कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़” का सपना केवल बड़े शहरों की परियोजनाओं से पूरा नहीं होगा। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं समान रूप से पहुंचेंगी।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर से निर्देश जारी होने और दो-दो स्मरण पत्र भेजे जाने के बाद भी विभाग फाइल दबाकर बैठा रहे, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इससे जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या “सुशासन” केवल मंचों और नारों तक सीमित होकर रह गया है?
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