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चिरमिरी @ जगन्नाथ धाम में उमड़ा श्रद्धा का महासागर, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के स्वागत में गूंजा चिरमिरी

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जय जगन्नाथ और जय श्रीराम के उद्घोष से भक्तिमय हुआ कोयलांचल का वातावरण
चिरमिरी,24 मई 2026 (घटती-घटना)।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चिरमिरी आगमन ने शनिवार को पूरे कोयलांचल क्षेत्र को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया, श्री श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर में जैसे ही जगद्गुरु का काफिला पहुंचा,मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंज उठा, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही मंदिर परिसर में लगनी शुरू हो गई थीं, महिलाएं,बुजुर्ग,युवा और बच्चे—हर वर्ग के लोगों में जगद्गुरु के दर्शन पाने की अद्भुत उत्सुकता दिखाई दी,मंदिर परिसर को पारंपरिक सजावट,पुष्पमालाओं और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप दिया गया था, शंखध्वनि,घंटियों की अनुगूंज और वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चिरमिरी की धरती पर किसी बड़े धार्मिक पर्व का आगमन हो गया हो।
वैदिक विधि से हुई विशेष पूजा-अर्चना
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के दर्शन किए और वैदिक रीति-विधान के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की,पूजा के दौरान उन्होंने राष्ट्र, प्रदेश और समस्त मानव समाज के सुख,शांति और समृद्धि की मंगलकामना की, उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं,बल्कि मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों का जीवन दर्शन है, पूजा-अर्चना के दौरान उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर आध्यात्मिक वातावरण में डूबे नजर आए, मंदिर में गूंजते भजन और वैदिक मंत्रों ने आयोजन को और अधिक दिव्य बना दिया,श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयघोष कर जगद्गुरु का अभिनंदन किया।
धार्मिक जागरण का केंद्र बन रहा चिरमिरी
गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य इन दिनों चिरमिरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, उनके प्रवास से पूरे क्षेत्र में धार्मिक जागरण और सनातन संस्कृति के प्रति नई चेतना का वातावरण निर्मित हो रहा है, धर्मप्रेमियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है,बल्कि समाज में सांस्कृतिक एकता और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है,चिरमिरी में उनका यह प्रवास आने वाले दिनों तक श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और आस्था का विषय बना रहेगा।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी रहे मौजूद
इस धार्मिक आयोजन में श्याम बिहारी जयसवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, उन्होंने जगद्गुरु का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे संतों का आगमन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का संचार करता है, उन्होंने मंदिर समिति और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी,मंत्री के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि,सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी भी कार्यक्रम में शामिल हुए, आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
महंत पुरुषोत्तम पुरी से हुई आध्यात्मिक चर्चा
मंदिर प्रवास के दौरान जगद्गुरु ने मंदिर के महंत पुरूषोत्तम पुरी से सौजन्य भेंट की, दोनों संतों के बीच भारतीय संस्कृति,सनातन परंपरा और समाज में धार्मिक चेतना के विस्तार को लेकर गंभीर चर्चा हुई,बताया गया कि इस दौरान समाज में नैतिक मूल्यों के संरक्षण और युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जगद्गुरु ने महंत जी के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया, दोनों संतों की मुलाकात श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।
दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़
जगतगुरू के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब देखने को मिला, कई श्रद्धालु दूर-दराज क्षेत्रों से केवल उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे,लोगों ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया, महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए तो युवाओं ने जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा, कई श्रद्धालुओं ने कहा कि जगद्गुरु के दर्शन मात्र से उन्हें आत्मिक शांति और नई ऊर्जा की अनुभूति हुई। देर शाम तक मंदिर परिसर श्रद्धा और भक्ति के रंग में डूबा रहा।


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