कोरबा,24 मई 2026। विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा बुका में आयोजित महासम्मेलन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने राज्य सरकार पर पेशा कानून लागू करने में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आदिवासियों के हक और अधिकारों को मजबूत करने के लिए पेशा कानून को प्राथमिकता दी थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पेशा कानून में ग्रामसभा को मजबूत अधिकार दिए थे। 85 आदिवासी जनपदों की पंचायतों में चक्रीय व्यवस्था के तहत महिला और पुरुष ग्रामसभा अध्यक्ष बनाए जाने का प्रावधान किया गया था। साथ ही पंचायत चुनाव लड़ चुके लोगों को इससे बाहर रखा गया था, ताकि गांव के आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
टीएस सिंहदेव ने कहा कि गांव के तालाबों और जल संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मछुआरों के हित में भी कांग्रेस सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की थी। जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ चार, सरई और तेंदूपत्ता जैसे वन उत्पाद आदिवासियों की आजीविका का आधार हैं और इन पर उनका वैधानिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना के लिए जंगल और जमीन अधिग्रहित की जाती है तो प्रभावित लोगों को सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि वन उत्पादों से होने वाली आजीविका का भी मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज स्थानीय लोग बांध और मत्स्य पालन के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जबकि यह उनका कानूनी हक है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लड़ाई लड़ें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के हक की लड़ाई आगे भी लड़ती रहेगी। महासम्मेलन में दीपक बैज, चरणदास महंत, ज्योत्सना महंत, जयसिंह अग्रवाल, प्रेमसाय सिंह, जनक राम ध्रुव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
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