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अम्बिकापुर@शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं…नवापारा के चर्चित ‘बंसल इलेक्टि्रकल’ मामले में विभागीय चुप्पी पर उठा सवाल

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‘कच्चे बिल और अलग-अलग खातों’ के आरोपों पर अब तक जांच शुरू नहीं होने से बाजार में चर्चा तेज


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,21 मई 2026 (घटती-घटना)। नवापारा के चर्चित इलेक्टि्रकल कारोबारी ‘बंसल इलेक्टि्रकल’ पर लगे गंभीर आरोपों के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आने से बाजार और व्यापारिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कच्चे बिल,जीएसटी से बचने के कथित खेल,परिवार और कर्मचारियों के खातों में भुगतान लेने जैसे आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि संबंधित विभाग तत्काल जांच शुरू करेगा,लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई का अभाव अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि यदि इतने गंभीर आरोप किसी छोटे व्यापारी पर लगे होते तो अब तक नोटिस, जांच और दस्तावेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती। लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों के मामलों में विभागीय चुप्पी लोगों को समझ नहीं आ रही।
आखिर किसका संरक्षण?
क्षेत्र में अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि आखिर ऐसा कौन सा संरक्षण है जिसके चलते मामले में अब तक कोई बड़ी जांच दिखाई नहीं दे रही। बाजार में चर्चा है कि प्रतिदिन लाखों रुपये के कारोबार वाले प्रतिष्ठान पर यदि लगातार कच्चे बिल देने,टैक्स इनवॉइस से बचने और अलग-अलग खातों में भुगतान लेने जैसे आरोप लग रहे हैं,तो संबंधित विभागों को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर लोगों के बीच यह संदेश जा रहा है कि बड़े कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करना विभागीय स्तर पर आसान नहीं रह गया है।
अलग-अलग खातों में लेनदेन की चर्चा ने बढ़ाई गंभीरता : मामले का सबसे संवेदनशील पहलू अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी में भुगतान लेने के आरोपों को माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि व्यापारिक भुगतान परिवारजनों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत खातों में लिया जा रहा है,तो इससे वास्तविक कारोबार और कर देनदारी को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि बैंकिंग लेनदेन,यूपीआई रिकॉर्ड और बिक्री रजिस्टर की तकनीकी जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ईमानदार व्यापारी
क्यों भुगतें नुकसान?

क्षेत्र के कई व्यापारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो कारोबारी नियमों के अनुसार टैक्स जमा कर रहे हैं, वे पहले से ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बाजार मंदी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि कुछ प्रतिष्ठान कथित रूप से टैक्स बचाकर कम कीमत पर व्यापार करते हैं तो इसका सीधा असर वैध व्यापार करने वालों पर पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो बाजार में गलत परंपरा को बढ़ावा मिलेगा।
विभागीय निष्कि्रयता पर उठा सवाल
लोगों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद भी यदि जांच प्रारंभ नहीं होती तो इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि…
– जीएसटी विभाग तत्काल बिक्री और बिलिंग रिकॉर्ड की जांच करे…
– बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन का परीक्षण किया जाए…
– वास्तविक कारोबार और दाखिल रिटर्न का मिलान हो…
– उपभोक्ताओं से प्राप्त बिलों की जांच कराई जाए…
– जांच पूरी होने तक मामले की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाए…
कार्रवाई नहीं तो
संदेह और गहराएगा…

नागरिकों का कहना है कि यदि इतने चर्चित मामले में भी कार्रवाई नहीं होती तो लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठने लगेगा।
अब बाजार में सबसे
बड़ा सवाल यही गूंज रहा है…

क्या बंसल इलेक्टि्रकल मामले में जांच होगी, या फिर यह मामला भी चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा?
पक्ष का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक संबंधित प्रतिष्ठान या विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि भविष्य में उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
‘जीएसटी बिल चाहिए तो अतिरिक्त भुगतान’ की चर्चा बरकरार
ग्राहकों के बीच अभी भी यह चर्चा जारी है कि प्रतिष्ठान में सामान्य खरीदी पर साधारण पर्ची दी जाती है,जबकि पक्का जीएसटी बिल मांगने पर अलग से राशि जोड़ने की बात कही जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है,लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई पंजीकृत व्यवसाय नियमित टैक्स इनवॉइस जारी नहीं करता और वास्तविक बिक्री को कम दर्शाता है,तो यह जीएसटी नियमों के उल्लंघन का विषय बन सकता है।


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