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सोनहत/कोरिया@ शमशान की जमीन पर वन माफियाओं का तांडव!

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मधला के श्मशान घाट में दिनदहाड़े पेड़ों की कटाई,ग्रामीणों में भारी आक्रोश
रक्षक ही बने भक्षक? — वन विभाग के कर्मचारी पुत्र और स्थानीय रसूखदार पर लगे गंभीर आरोप
सोनहत/कोरिया,14 मई 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम मधला इन दिनों एक ऐसे मामले को लेकर सुर्खियों में है, जिसने न सिर्फ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है,गांव के श्मशान घाट परिसर में लगे यूकेलिप्टस के दर्जनों पेड़ों की कथित अवैध कटाई ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है,ग्रामीणों का आरोप है कि दिनदहाड़े मशीनें लगाकर पेड़ों को गिराया गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना रहा,अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर श्मशान जैसी सार्वजनिक और संवेदनशील भूमि पर पेड़ों की कटाई किसके संरक्षण में हो रही थी?
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम मधला के श्मशान घाट क्षेत्र में वर्षों पहले हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए गए थे,लेकिन अब वही पेड़ कथित लकड़ी तस्करों के निशाने पर आ गए हैं,सूत्रों का दावा है कि अब तक 30 से 40 पेड़ काटे जा चुके हैं, कटाई इतनी बेखौफ तरीके से हुई कि लोगों का कहना है —ऐसा लग रहा था मानो कोई सरकारी अनुमति लेकर पूरा सफाया किया जा रहा हो। ग्रामीणों का आरोप है कि जेसीबी और मशीनों की मदद से दिनदहाड़े कटाई की गई, लेकिन वन विभाग और प्रशासन की ओर से समय रहते कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं हुआ।
सड़क जनता के लिए या तस्करों के लिए?
गांव में अब यही सवाल गूंज रहा है कि क्या सड़क निर्माण का फायदा जनता को मिलेगा या फिर लकड़ी माफियाओं को? ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी सख्ती नहीं हुई,तो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के पेड़ साफ कर दिए जाएंगे,क्योंकि अब कटाई जंगलों से निकलकर श्मशान घाट तक पहुंच चुकी है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त नाराजगी है,उन्होंने साफ कहा है कि यदि जल्द दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और नुकसान की भरपाई नहीं कराई गई,तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा, ग्रामीणों का कहना है कि आज श्मशान की जमीन पर पेड़ कट रहे हैं,कल कोई और सार्वजनिक जमीन कब्जे में ले ली जाएगी, अगर अभी आवाज नहीं उठाई गई,तो आने वाली पीढि़यों के लिए कुछ नहीं बचेगा।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर है, क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच होगी? क्या नामजद लोगों पर कार्रवाई होगी? क्या कटे पेड़ों की भरपाई कराई जाएगी? क्या श्मशान भूमि को सुरक्षित घोषित कर निगरानी बढ़ाई जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे,लेकिन फिलहाल ग्राम मधला में एक ही चर्चा है —हरे पेड़ों की हत्या हुई है…और जिम्मेदार अब भी खुले घूम रहे हैं।
खानापूर्ति वाली जांच पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग सिर्फ दिखावे की जांच कर रहा है,लोगों का कहना है कि अगर वास्तव में कार्रवाई करनी होती,तो मशीनें जब्त होतीं,लकड़ी कब्जे में ली जाती,आरोपियों पर एफआईआर दर्ज होती, नुकसान का आंकलन कर वसूली होती, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ,यही वजह है कि विभाग की नीयत और निष्पक्षता दोनों सवालों के घेरे में हैं।
सड़क स्वीकृत होते ही सक्रिय हुए तस्कर?
ग्रामीणों ने मामले में एक और गंभीर पहलू उठाया है, उनका कहना है कि कुशमाहा से मधला तक नई पक्की सड़क की स्वीकृति मिलते ही लकड़ी तस्करों की गतिविधियां बढ़ गईं,ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बनने से पहले ही तस्करों ने यह समझ लिया कि अब लकड़ी की ढुलाई आसान हो जाएगी, यानी विकास की सड़क आने से पहले ही तस्करों ने व्यापारिक संभावना तलाश ली।
आस्था पर चोट,ग्रामीणों में उबाल
श्मशान घाट सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं होता,वह समाज की आस्था, परंपरा और संवेदनाओं से जुड़ा स्थान होता है,ऐसे स्थान पर हरियाली उजाड़े जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है,लोगों का कहना है कि जिस जगह पर अंतिम संस्कार होते हैं,जहां लोग अपने पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े रहते हैं,वहां इस तरह पेड़ों की कटाई करना सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है,ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते कटाई नहीं रोकी गई,तो पूरा श्मशान क्षेत्र उजड़ जाएगा।
दिनदहाड़े कटाई…आखिर किसकी शह पर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सार्वजनिक भूमि पर इतनी बड़ी कटाई बिना संरक्षण के कैसे संभव है? ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब किसी सामान्य व्यक्ति के बस की बात नहीं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में रसूखदार लोगों और विभागीय संरक्षण की बू साफ दिखाई दे रही है,लोग पूछ रहे हैं—अगर पेड़ अवैध रूप से काटे जा रहे थे, तो वन विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
नामजद शिकायत से मचा हड़कंप
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरिया और डीएफओ बैकुंठपुर को सौंपे गए शिकायत पत्र में कुछ लोगों पर सीधे आरोप लगाए, ग्रामीणों का दावा है कि अवैध कटाई के पीछे गांव के ही एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि और वन विभाग के कर्मचारी के पुत्र की भूमिका है,यही आरोप अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहे हैं, क्योंकि यदि ग्रामीणों की बात सही है,तो यह सिर्फ अवैध कटाई का मामला नहीं,बल्कि रसूख और विभागीय पहुंच के गठजोड़ का उदाहरण बन सकता है।
रक्षक के घर से ही भक्षक?
ग्रामीणों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि जिस विभाग का काम जंगल और पेड़ों की रक्षा करना है,उसी विभाग से जुड़े लोगों के नाम अब कटाई मामले में सामने आ रहे हैं,लोग व्यंग्य में कह रहे हैं की अब जंगल बचाने वाले ही जंगल साफ करवाने में लगे हैं, यही वजह है कि ग्रामीणों का भरोसा विभागीय कार्रवाई पर कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
शिकायत के बाद भी नहीं रुकी कटाई?
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को मामले की जानकारी दे दी थी। लेकिन इसके बावजूद कटाई का काम जारी रहा,जब मामला बढ़ा और ग्रामीण सामूहिक रूप से शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे,तब जाकर विभाग की नींद टूटी,अगले दिन पटवारी और वन विभाग की टीम मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिक निरीक्षण बनकर रह गई,समाचार लिखे जाने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ ठोस दंडात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई थी।


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