

रिकॉर्ड में टनभर खाद,गोदाम में पसरा सन्नाटा!
जांच से पहले रातों-रात भरे गए नए गोदाम ने बढ़ाया शक, करोड़ों की गड़बड़ी की आशंका से प्रशासन में हड़कंप
-राजेन्द्र शर्मा-
कोरिया/खड़गवां,14 मई 2026 (घटती-घटना)। जिले के जिल्दा ग्राम स्थित आदिम जाति सहकारी समिति में खाद भंडारण और स्टॉक में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, किसानों के लिए रखी गई खाद के कथित घोटाले की शिकायत सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों द्वारा की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए।
ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन द्वारा सील किए गए चार गोदामों को जब अधिकारियों की मौजूदगी में खोला गया तो अंदर की स्थिति देखकर जांच टीम भी दंग रह गई, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कृषि विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर खाद के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया, जिसमें भारी अंतर सामने आया।
रिकॉर्ड में 71.5 मीट्रिक टन यूरिया, मौके पर मिला केवल 54 टन!
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड के अनुसार गोदाम में 71.5 मीट्रिक टन यूरिया होना चाहिए था, लेकिन मौके पर केवल लगभग 54 मीट्रिक टन ही मिला,वहीं डीएपी, पोटाश, एनपीके और एसएसपी खाद के स्टॉक में भी भारी कमी पाई गई, अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआती जांच का आंकड़ा है,वास्तविक स्थिति विस्तृत सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी,सूत्रों की मानें तो खाद की कमी करोड़ों रुपए की गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है। यही वजह है कि प्रशासन अब पूरे मामले को गंभीर आर्थिक अनियमितता के रूप में देख रहा है।
जांच से पहले रातों-रात भरा गया नया गोदाम!
ग्रामीणों ने जांच टीम के सामने आरोप लगाया कि मामले की भनक लगते ही जांच से ठीक पहले रातों-रात एक नए गोदाम — मनोरंजन भवन — में खाद भरकर रखी गई, ताकि वास्तविक कमी को छिपाया जा सके, मौके पर जमीन में बिखरी खाद, अव्यवस्थित ढंग से रखी बोरियां और जल्दबाजी में किए गए भंडारण के संकेत ग्रामीणों के आरोपों को और मजबूत करते नजर आए, ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं होती तो पूरा मामला दबा दिया जाता।
नियमों को ताक पर रखकर किया गया खाद का भंडारण
जांच में पहुंचे कृषि विभाग के एसडीओ धनंजय सोनी ने भी भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए, उन्होंने बताया कि अलग-अलग प्रकार की खाद को बिना किसी वर्गीकरण के एक साथ रख दिया गया था। कई जगह यूरिया और डीएपी मिश्रित अवस्था में मिले, जो भंडारण के नियमों का खुला उल्लंघन है, इतना ही नहीं, गोदामों में खाद के साथ भूसे की बोरियां तक रखी मिलीं, जिसे अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही माना। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह का अव्यवस्थित भंडारण न सिर्फ नियम विरुद्ध है बल्कि इससे खाद की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
हर सीजन में किसानों को बताया जाता था खाद खत्म
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि समिति प्रबंधन वर्षों से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करा रहा था,हर सीजन में खाद की कमी का हवाला दिया जाता था, जबकि रिकॉर्ड में पर्याप्त स्टॉक दर्ज रहता था, किसानों का आरोप है कि खाद की कालाबाजारी कर निजी स्तर पर बिक्री की जाती रही और जरूरतमंद किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ता था,अब जांच में सामने आई गड़बड़ी ने किसानों के आरोपों को और बल दे दिया है।
समिति प्रबंधक मोबाइल बंद कर हुआ गायब
मामले के केंद्र में आए समिति प्रबंधक अखिलचंद सिंह फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं, ग्रामीणों के अनुसार जांच शुरू होते ही उनका मोबाइल बंद हो गया और वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, इससे पूरे मामले में संदेह और गहरा गया है।
दोबारा सील हुए गोदाम,कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद प्रशासन ने सभी गोदामों को दोबारा सील कर दिया है, अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को सौंपी जाएगी, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, अब बड़ा सवाल यही है कि किसानों के हक की खाद आखिर गई कहां? रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर सिर्फ लापरवाही है या फिर इसके पीछे लंबे समय से चल रहा कोई संगठित खेल? आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।
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