पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, शिक्षा विभाग में नियम विरुद्ध प्रभारों का लगाया आरोप
एमसीबी,08 मई 2026 (घटती-घटना)। जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिले में नियम-कायदों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से प्रभार बांटे गए और शिक्षा व्यवस्था को प्रयोगशाला बनाकर चलाया गया, उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के कार्यकाल में जिले को जैसे-तैसे चलाया गया और कई ऐसे निर्णय लिए गए जो प्रशासनिक नियमों और शासकीय प्रक्रियाओं के विपरीत थे।
बता दे की एमसीबी जिला की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे ये सवाल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं,बल्कि सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े हैं, यदि आरोप सही हैं तो यह केवल नियमों की अनदेखी का मामला नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाता है।
स्कूल खाली,दफ्तर भरे
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में बिना स्वीकृत पदों के लोगों को जिम्मेदारियां और प्रभार सौंप दिए गए, उन्होंने आरोप लगाया कि पात्रता और वरिष्ठता की अनदेखी कर कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में बैठाया गया, जबकि दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल शिक्षक विहीन होते चले गए, व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने कहा कि ऐसा लगने लगा था मानो शिक्षा विभाग का असली उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई नहीं बल्कि कार्यालयों में कुर्सियां भरना रह गया हो, उन्होंने कहा कि कई स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर कार्यालयों में अटैच कर दिया गया और परिणाम यह हुआ कि गांवों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती चली गई।
एकल शिक्षक स्कूलों की बिगड़ी स्थिति
गुलाब कमरो ने कहा कि जिले में पहले से ही एकल शिक्षक स्कूलों की स्थिति चिंताजनक थी, लेकिन प्रशासनिक निर्णयों ने हालात और खराब कर दिए,जहां एक शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहा था,वहां से भी शिक्षकों
को कार्यालयों में अटैच कर दिया गया,उन्होंने कहा कि जब गांवों के बच्चे शिक्षक के इंतजार में बैठे हों और शिक्षक फाइलों के बीच बैठा हो, तब समझा जा सकता है कि शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जा रही है,उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद शिक्षा विभाग ने यह मान लिया था कि बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा जरूरी दफ्तरों की कुर्सियों को गर्म रखना है।
नियम किताबों में,व्यवस्था मनमर्जी से
मनेंद्रगढ़ विकासखंड में प्रभारी विकासखंड स्रोत समन्वयक के प्रभार को लेकर भी पूर्व विधायक ने गंभीर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि शासन के स्पष्ट नियमों के बावजूद परिवीक्षा अवधि में कर्मचारी को प्रभार और आहरण-संवितरण जैसे अधिकार दे दिए गए,उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे अधिकार स्थायी और पात्र अधिकारियों को दिए जाते हैं,लेकिन यहां नियमों से ज्यादा व्यवस्था प्रभावी नजर आई, व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होने लगा था मानो शासन के नियम सिर्फ फाइलों में सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हों,पालन
के लिए नहीं।
ईमानदार प्रशासन पर भी सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सबसे बड़ा हमला तत्कालीन प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बोला,उन्होंने कहा तत्कालीन ईमानदार कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के कार्यकाल में भी भारी अनियमितताएं हुईं, जिले को जैसे-तैसे चलाया गया और नियम विरुद्ध प्रभारों पर प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। जब नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएं, तब व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है, उनके इस बयान के बाद जिले की प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
प्रभार संस्कृति ने बिगाड़ी व्यवस्था?
जिले में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि शिक्षा विभाग में प्रभार संस्कृति तेजी से बढ़ी, जहां नियमित नियुक्ति और पात्रता के आधार पर जिम्मेदारियां तय होनी चाहिए थीं,वहां अस्थायी प्रभारों के जरिए पूरी व्यवस्था चलाई जाती रही,
जानकारों का मानना है कि जब किसी विभाग में स्थायी व्यवस्था की जगह अस्थायी प्रभारों पर निर्भरता बढ़ जाती है,तब जवाबदेही भी कमजोर पड़ जाती है,इसी का असर अब जिले की शिक्षा गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों में दिखाई देने लगा है।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर उठे सवाल
पूर्व विधायक ने कहा कि आज जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरे छत्तीसगढ़ में बदहाल स्थिति का उदाहरण बन चुकी है,उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र कर्मचारियों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से जिम्मेदारियां दी गईं और इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा,उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अव्यवस्था का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को हुआ जिनका भविष्य सरकारी स्कूलों पर निर्भर है।
जांच हो,जवाबदेही तय हो
गुलाब कमरो ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय की शरण ली जाएगी,उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों
के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चा
पूर्व विधायक के बयान के बाद जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है,अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वास्तव में नियमों की अनदेखी कर प्रभार दिए गए? क्या पात्र अधिकारियों की उपेक्षा हुई? क्या स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर कार्यालयों में बैठाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के पीछे प्रशासनिक निर्णय जिम्मेदार हैं?
शिक्षा विभाग पर पहले भी उठते रहे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब जिले के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों, पहले भी शिक्षकों की कमी,अटैचमेंट,कार्यालयों में पदस्थापन और कमजोर परीक्षा परिणामों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब जब पूर्व विधायक ने सीधे तौर पर तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया है,तब मामला और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
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