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मनेन्द्रगढ़@ मनेन्द्रगढ़ में नलों से टपक रहा ‘मटमैला जहर’ क्या बीमारी की दहलीज पर खड़ा है शहर?

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दूषित पानी से जनता बेहाल,अस्पतालों में बढ़े मरीज,कांग्रेस ने खोला मोर्चा
मनेन्द्रगढ़,08 मई 2026(घटती-घटना)।
मनेन्द्रगढ़ में इन दिनों नगर पालिका की लापरवाही आम जनता की सेहत पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है, भीषण गर्मी के बीच शहर के कई वार्डों में नलों से स्वच्छ पेयजल के बजाय मटमैला,दुर्गंधयुक्त और रेत मिश्रित पानी सप्लाई किया जा रहा है,स्थिति ऐसी बन गई है कि लोगों के घरों तक पहुंच रहा पानी अब जीवन नहीं बल्कि बीमारी का कारण बनता नजर आ रहा है।
शहर के वार्डों में लगातार कई दिनों से गंदे पानी की आपूर्ति होने के कारण जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है,स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी से इतनी तेज बदबू आ रही है कि उसे न पीने योग्य माना जा सकता है और न ही घरेलू उपयोग के लायक, कई घरों में पानी के साथ रेत, मिट्टी और कीड़े आने की शिकायतें सामने आई हैं,लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन शिकायतों के बावजूद लंबे समय से केवल आश्वासन देता रहा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं किया गया, मनेन्द्रगढ़ की जनता इस समय बूंद-बूंद स्वच्छ पानी के लिए संघर्ष कर रही है, नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही ने शहर को संभावित स्वास्थ्य संकट के सामने खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है, अब देखना यह होगा कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है या फिर वास्तव में शहरवासियों को मटमैले जहर से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।


सियासत भी गरमाई, कांग्रेस ने भाजपा शासित नगर पालिका को घेरा
दूषित जल आपूर्ति का मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है,ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने नगर पालिका प्रशासन और भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोला है, उन्होंने कहा कि नगर पालिका जनता को साफ पानी नहीं बल्कि बीमारी बांट रही है। जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि एयर कंडीशन कमरों में बैठकर मिनरल वाटर पी रहे हैं, जबकि आम नागरिकों को नाले जैसा पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शहर की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ,स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाए गए और जल आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई,तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
प्रशासन से उठ रहे बड़े सवाल, अब शहर में कई गंभीर सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं…
क्या नगर पालिका प्रशासन किसी बड़ी महामारी का इंतजार कर रहा है?
जल गुणवत्ता की जांच करने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं?
फिल्टर प्लांट की नियमित मॉनिटरिंग क्यों नहीं हो रही?
चिरमिरी जैसी घटनाओं से सबक लेने के बाद भी पाइपलाइन सुधार कार्य अधूरा क्यों है?
क्या जनता की जिंदगी प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुका रही है?

जब फूटा जनता का गुस्सा…बोतलों में भरकर ले गए गंदा पानी…
लगातार बिगड़ती स्थिति के बाद आखिरकार वार्डवासियों का सब्र टूट गया,नाराज लोग बोतलों और डिब्बों में गंदा पानी भरकर सीधे जल प्रदाय कार्यालय पहुंच गए,वहां लोगों ने अधिकारियों के सामने दूषित पानी दिखाकर जमकर नाराजगी जताई, सूचना मिलते ही नगर पालिका उपाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और तत्काल जल सप्लाई बंद करवाने के निर्देश दिए,कर्मचारियों को फटकार भी लगाई गई,लेकिन इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि आखिर फिल्टर प्लांट से बिना पर्याप्त शुद्धिकरण के यह पानी शहर की पाइपलाइन तक कैसे पहुंच रहा था? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जल शुद्धिकरण व्यवस्था केवल कागजों में संचालित हो रही है, जबकि वास्तविकता में न तो नियमित जांच हो रही है और न ही पाइपलाइन की सही तरीके से मरम्मत।


पाइपलाइन लीकेज बना बड़ा कारण?
जानकारों का मानना है कि शहर की पुरानी और जर्जर पाइपलाइन दूषित पानी की सबसे बड़ी वजह हो सकती है,कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं,आशंका जताई जा रही है कि सीवर और नालियों का गंदा पानी लीकेज के जरिए पेयजल लाइन में मिल रहा है,स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पाइपलाइन सुधार के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती रही, परिणामस्वरूप अब पूरा शहर स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
दूषित पानी का असर अब अस्पतालों में भी दिखाई देने लगा है, स्थानीय अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में पेट दर्द,उल्टी-दस्त, डायरिया और त्वचा रोग से पीडि़त मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है, डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि पानी को उबालकर और छानकर ही उपयोग करें,चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में दूषित पानी तेजी से संक्रमण फैलाता है और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो पीलिया और जलजनित बीमारियों का खतरा गंभीर रूप ले सकता है।
जनता की मांग युद्ध स्तर पर हो कार्रवाई
शहरवासियों ने मांग की है कि दूषित जल आपूर्ति वाले क्षेत्रों में तत्काल साफ पानी के टैंकर भेजे जाएं,साथ ही पूरे शहर की पाइपलाइन की जांच कर लीकेज दुरुस्त किए जाएं,लोगों का कहना है कि केवल बयानबाजी और निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा,जरूरत इस बात की है कि फिल्टर प्लांट की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
नल खोलते ही निकल रहा गंदा पानी,बच्चों की सेहत खतरे में
शहर के रहवासियों का कहना है कि सुबह-शाम जब पानी सप्लाई होता है तो नलों से साफ पानी के बजाय पीले और मटमैले रंग का पानी निकलता है,कई मोहल्लों में महिलाओं ने बताया कि पानी को कुछ देर रखने पर बर्तन के नीचे गाद और रेत जम जाती है, लोगों का कहना है कि छोटे बच्चे,बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं,भीषण गर्मी में स्वच्छ पानी की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है,कई परिवार अब बाजार से पानी खरीदने को मजबूर हैं,जबकि गरीब तबके के लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की ही खड़ी हो गई है।


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