
- कलेक्ट्रेट में छाई बेचैनी!
- कलेक्टर बदलीं तो मायूस हुआ ‘सिपहसालार’ नेटवर्क! कोरिया कलेक्ट्रेट में चर्चाओं का दौर
- कोरिया कलेक्ट्रेट का ‘इनर सर्किल’ संकट में, चंदन त्रिपाठी के तबादले के बाद बढ़ी धड़कनें
- अभियान, पुरस्कार और छवि की राजनीति, अब बलरामपुर में होगा नया अध्याय
- कलेक्टर चली गईं, लेकिन सवाल बाकी, क्या खत्म होगा कलेक्ट्रेट का संगठित गिरोह?
- कोरिया से बलरामपुर पहुंचीं चंदन त्रिपाठी, पीछे छोड़ गईं चर्चाओं का लंबा दौर
- “काम कम, चमक ज्यादा?” तबादले के बाद फिर चर्चा में कोरिया कलेक्टर का कार्यकाल
- कलेक्ट्रेट में चलता था समानांतर प्रशासन? तबादले के बाद खुलकर होने लगी चर्चा
- कोरिया में पुरस्कारों वाला प्रशासन या दिखावे की सरकार? तबादले के बाद उठे सवाल
- कलेक्टर बदलीं,अब बदलेंगे समीकरण? कोरिया कलेक्ट्रेट की लॉबी में छाई बेचैनी
- कोरिया से बलरामपुर रवाना हुईं कलेक्टर चंदन त्रिपाठी,लेकिन “सिपहसालारों” का क्या होगा?
- कलेक्टर बदलते ही कलेक्ट्रेट के गलियारों में छाई बेचैनी
- “चुगली ब्रिगेड” और “स्टेनो लॉबी” के भविष्य पर चर्चा तेज
- क्या कहते हैं आलोचक
- स्वास्थ्य व्यवस्था आज भी बदहाल है
- ग्रामीण सड़कें कई जगह खराब हैं
- राजस्व विवादों का ढेर लगा है
- पेयजल संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
- कई योजनाएं कागजों और आयोजनों तक सीमित रहीं ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि सब कुछ इतना सफल था, तो जनता की मूल समस्याएं लगातार क्यों बनी रहीं?
–रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,07 मई 2026(घटती-घटना)। राज्य शासन द्वारा जारी बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद कोरिया जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है,कोरिया कलेक्टर रहीं चंदन संजय त्रिपाठी को अब बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, आदेश जारी होते ही जहां एक ओर औपचारिक बधाइयों का दौर शुरू हुआ, वहीं दूसरी ओर कोरिया कलेक्ट्रेट के भीतर एक अलग तरह की बेचैनी, खामोशी और हलचल भी देखने को मिलने लगी,कलेक्ट्रेट के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उन लोगों को लेकर हो रही है जिन्हें पिछले कुछ वर्षों से कलेक्टर के खास, इनर सर्किल, सिपहसालार नेटवर्क या फिर व्यंग्य में चुगली ब्रिगेड कहा जाता रहा। अब जब कलेक्टर बदल गई हैं, तो सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस कथित नेटवर्क का भविष्य क्या होगा? क्या नई कलेक्टर के आने के बाद प्रशासनिक समीकरण बदलेंगे या फिर वही पुराना ढांचा नए चेहरे के साथ काम करता रहेगा?
पुरस्कार ज्यादा, लेकिन समस्याएं भी बरकरार?
चंदन त्रिपाठी के कार्यकाल में जिले को कई पुरस्कार,प्रशंसा और प्रशासनिक उपलब्धियां मिलीं। लेकिन अब उनके जाने के बाद विरोधी खेमे से यह आवाज भी उठने लगी है कि क्या ये उपलब्धियां स्थायी बदलाव में बदल पाईं?
कोरिया में अब क्या बदलेगा?
कोरिया जिले में अब नए कलेक्टर के रूप में पुष्पा साहू की एंट्री हो रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कलेक्ट्रेट की प्रशासनिक संस्कृति बदलेगी? क्या चुगली ब्रिगेड का असर खत्म होगा? क्या स्टेनो लॉबी कमजोर पड़ेगी? क्या नई कलेक्टर पूरी तरह नई टीम बनाएंगी? या फिर पुरानी व्यवस्था ही नए चेहरे के साथ चलती रहेगी? फिलहाल कलेक्ट्रेट के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इन्हीं सवालों को लेकर है।
उपलब्धियों और आरोपों के बीच खत्म हुआ कार्यकाल
कोरिया कलेक्टर के रूप में चंदन संजय त्रिपाठी का कार्यकाल उपलब्धियों,पुरस्कारों, अभियानों और विवादों—सभी का मिश्रण रहा,समर्थकों के लिए यह ऊर्जावान और चर्चित प्रशासनिक कार्यकाल था,जबकि आलोचकों के लिए यह छवि आधारित प्रशासन का दौर रहा, अब जब वे बलरामपुर जा चुकी हैं,तो कोरिया में सिर्फ एक सवाल बाकी है क्या आने वाला प्रशासन दिखावे और प्रचार से आगे बढ़कर स्थायी बदलाव की दिशा में काम करेगा, या फिर जिले में अभियान,फोटो और पुरस्कारों की राजनीति ही जारी रहेगी?
मुख्यमंत्री कार्यक्रमों की चूक के बावजूद दोबारा जिला,चर्चा में रहीं चंदन त्रिपाठी
कोरिया जिले की तत्कालीन कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी को बलरामपुर जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं,वजह यह है कि कोरिया में मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी के कार्यक्रमों में कई व्यवस्थागत कमियां सामने आने के बावजूद उन्हें दोबारा जिला मिल गया,मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी ने मंच से कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं होने की बात कही थी,वहीं मुख्यमंत्री के कोरिया उत्सव दौरे में अतिथियों के विश्रामगृह आवंटन को लेकर भी अव्यवस्था चर्चा में रही। कार्यक्रम समाप्त होते ही प्रशासनिक तैयारियों की पोल भी खुल गई थी। इसके बाद भी उन्हें नए जिले की जिम्मेदारी मिलना प्रशासनिक चमत्कार की तरह देखा जा रहा है,मुख्यमंत्री कार्यक्रम में हुई चूक के बाद एक जनपद सीईओ को हटाकर दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी देने का मामला भी चर्चा में रहा,हाईकोर्ट की टिप्पणी के बावजूद मूल सीईओ को प्रभार न दिए जाने को लेकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे।
चिडि़यों की तस्वीरों की शौकीन कलेक्टर अब बलरामपुर में पूरा करेंगी अपना शौक
चंदन संजय त्रिपाठी अपने प्रशासनिक कामों के साथ-साथ पक्षियों की फोटोग्राफी के शौक को लेकर भी चर्चा में रही हैं, कोरिया जिले में पदस्थ रहते हुए वे कई बार प्राकृतिक क्षेत्रों में पक्षियों की तस्वीरें खींचती नजर आई थीं,अब उनका तबादला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हुआ है,जो घने जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है,झारखंड सीमा से लगे इस वन क्षेत्र में पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं,ऐसे में प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी मजाकिया अंदाज में चल रही है कि बलरामपुर जिला उनके लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ बर्ड फोटोग्राफी का नया केंद्र साबित हो सकता है,कुछ लोग इसे हल्के-फुल्के अंदाज में उनकी नई उपलब्धि भी बता रहे हैं।
कलेक्ट्रेट में चलता था समानांतर प्रशासन?
कोरिया कलेक्ट्रेट में लंबे समय से यह चर्चा आम रही कि जिले में केवल सरकारी प्रशासन ही नहीं,बल्कि एक अनौपचारिक शक्ति केंद्र भी सक्रिय था, आरोप यह लगते रहे कि कुछ चुनिंदा अधिकारी,बाबू, स्टेनो और करीबी कर्मचारी ऐसा प्रभाव रखते थे कि कई मामलों में वास्तविक प्रक्रिया से ज्यादा महत्व उनकी राय को दिया जाता था, सूत्रों की मानें तो यह समूह केवल फाइलों तक सीमित नहीं था,बल्कि कौन अधिकारी कलेक्टर के करीब माना जाएगा और किसकी छवि खराब होगी, यह तय करने में भी भूमिका निभाता था,कई विभागीय अधिकारियों के बीच यह धारणा बन चुकी थी कि काम से ज्यादा पहुंच मायने रखती है,कलेक्ट्रेट में कई बार यह चर्चा सुनाई देती थी कि यदि किसी अधिकारी को अपनी बात ऊपर तक पहुंचानी है,तो उसे पहले इनर सर्किल की मंजूरी चाहिए, यही वजह रही कि कुछ कर्मचारी और अधिकारी खुद को बेहद प्रभावशाली मानने लगे थे।
चुगली गैंग और स्टेनो लॉबी चर्चा में क्यों?
तबादले के बाद सबसे ज्यादा जिन शब्दों की चर्चा हो रही है,उनमें चुगली गैंग और स्टेनो लॉबी प्रमुख हैं,कलेक्ट्रेट के भीतर यह आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे कि कुछ लोग नियमित रूप से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतें, गतिविधियां और निजी चर्चाएं ऊपर तक पहुंचाने का काम करते थे। बदले में उन्हें करीबी होने का लाभ मिलता था,हालांकि इन आरोपों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई,लेकिन दफ्तरों में फुसफुसाहट हमेशा बनी रही। कई अधिकारी निजी बातचीत में यह तक कहते रहे कि फाइल से ज्यादा फीडबैक सिस्टम काम कर रहा था,अब जब कलेक्टर का तबादला हो गया है, तो यही लोग सबसे ज्यादा असहज बताए जा रहे हैं,कलेक्ट्रेट में चर्चा है कि नई कलेक्टर अपनी अलग टीम बनाएंगी या पुराने नेटवर्क पर ही भरोसा करेंगी।
बैकुंठपुर एसडीएम समेत कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी समय-समय पर होती रही कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ फील्ड अधिकारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। विशेष रूप से बैकुंठपुर एसडीएम और कुछ अन्य अधिकारियों के नाम कई बार चर्चाओं में आए,हालांकि इन बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन कर्मचारियों के बीच यह धारणा बनती चली गई कि कुछ अधिकारी मैदानी काम से ज्यादा ऊपरी मैनेजमेंट में सक्रिय रहते थे,यही वजह है कि अब तबादले के बाद लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या नई प्रशासनिक टीम पुराने समीकरणों को जारी रखेगी या फिर पूरी कार्यशैली बदल जाएगी।
आवा पानी झोंकी से राष्ट्रीय पहचान,लेकिन सवाल भी साथ आए
कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में आवा पानी झोंकी अभियान रहा। इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया,इसके बाद जिले की प्रशासनिक छवि को लेकर काफी प्रचार हुआ और कोरिया राष्ट्रीय चर्चाओं में आया,समर्थकों ने इसे अभिनव पहल बताया,लेकिन विरोधियों ने इसे इवेंट आधारित प्रशासन कहकर सवाल उठाए,आलोचकों का कहना था कि अभियान का प्रचार ज्यादा हुआ,जबकि जमीनी असर सीमित दिखाई दिया, कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट और मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं। अब तबादले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह अभियान आगे भी जारी रहेगा या फिर फाइलों और फोटो एल्बम तक सिमट जाएगा।
व्हाट्सएप समूह में बधाई संदेशों ने भी बढ़ाई चर्चा
कलेक्टर कोरिया के तबादले के बाद कुछ अधिकारियों द्वारा व्हाट्सएप समूहों में तत्काल बधाई संदेश दिए जाने की भी खूब चर्चा रही, सामान्यतः किसी अधिकारी के स्थानांतरण पर ऐसी सार्वजनिक सक्रियता कम दिखाई देती है,लेकिन इस मामले में कई संदेश सामने आए, इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि यह बधाई केवल औपचारिक नहीं,बल्कि मनचाही पोस्टिंग मिलने की खुशी भी हो सकती है,कुछ लोगों का मानना है कि यह संदेश तत्कालीन कलेक्टर से अधिकारियों की निकटता और उनके प्रायोजित तबादलों की चर्चाओं को भी हवा देते नजर आए।
छवि प्रबंधन बनाम सक्रिय प्रशासन
कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के कार्यकाल को लेकर सबसे बड़ी बहस यही रही कि क्या यह सक्रिय प्रशासन था या छवि आधारित प्रशासन? आलोचकों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में बड़े-बड़े आयोजन,स्वागत कार्यक्रम,मीडिया कवरेज और विशेष अभियान पर ज्यादा फोकस रहा। उनका दावा है कि प्रशासनिक छवि निर्माण को प्राथमिकता दी गई,वहीं समर्थकों का कहना है कि उन्होंने जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई,प्रशासन को सक्रिय बनाया और योजनाओं की मॉनिटरिंग को गति दी, यानी एक वर्ग उन्हें ऊर्जावान अधिकारी मानता है,जबकि दूसरा वर्ग इसे ब्रांडिंग आधारित प्रशासन कहता है।
राहुल वेंकट को लेकर भी चर्चा
इस तबादला सूची में MCB कलेक्टर राहुल वेंकट का नाम भी चर्चा में है। उन्हें किसी जिले की नई जिम्मेदारी देने के बजाय मंत्रालय भेजा गया है,प्रशासनिक हलकों में राहुल वेंकट को शांत,सरल और नियम आधारित अधिकारी माना जाता रहा है। ऐसे में अब तुलना भी शुरू हो गई है,कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या दिखने वाला प्रशासन ज्यादा महत्व पा रहा है और शांत काम करने वाले अधिकारी पीछे छूट रहे हैं? हालांकि यह पूरी तरह प्रशासनिक और राजनीतिक व्याख्या का विषय है, लेकिन तबादले के बाद ऐसी चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
बलरामपुर में अब कैसी होगी चंदन त्रिपाठी की कार्यशैली?
अब चंदन त्रिपाठी को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की जिम्मेदारी दी गई है, यह जिला प्रशासनिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। आदिवासी क्षेत्र, सीमावर्ती गतिविधियां और विकास की चुनौतियां यहां हमेशा प्रशासन के सामने रहती हैं, अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि वहां उनकी कार्यशैली कैसी रहती है, क्या वहां भी अभियान आधारित प्रशासन देखने को मिलेगा? क्या वहां भी इनर सर्किल जैसी चर्चाएं होंगी? या फिर जमीनी समस्याओं पर ज्यादा फोकस किया जाएगा?
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