Breaking News

अम्बिकापुर@अंबिकापुर अग्निकांड में बड़ा फैसलाः पटाखा भंडारण और भीषण आग मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

Share


घनी आबादी में ज्वलनशील सामग्री रखने पर न्यायालय सख्त,जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,07 मई 2026 (घटती-घटना)। शहर के बहुचर्चित अग्निकांड मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा ने आरोपी प्रवीण कुमार अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला थाना अंबिकापुर के अपराध क्रमांक 259/2026 से जुड़ा हुआ है, जिसमें प्रारंभिक रूप से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125, 270 एवं 287 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। बाद में जांच के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 324(6), 326(छ) बीएनएस तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 9(ख)(द्ब)(ख) भी जोड़ी गई।
राम मंदिर रोड की घटना
ने खड़े किए कई सवाल

न्यायालयीन अभिलेखों के अनुसार 23 अप्रैल 2026 को राम मंदिर रोड स्थित एक दुकान में भीषण आग लग गई थी। आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि दुकान में प्लास्टिक सामग्री का व्यवसाय संचालित होता था और आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी। हालांकि पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और केस डायरी में कई गंभीर तथ्य सामने आए। न्यायालय के आदेश में उल्लेख किया गया कि घटना स्थल से अधजले पटाखों के अवशेष मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि घनी रिहायशी गली में पटाखों और प्लास्टिक सामग्री का भंडारण किया जा रहा था। बताया गया कि घटना के समय दुकान की छत पर वेल्डिंग का कार्य चल रहा था और वेल्डिंग की चिंगारियों से आग फैलने की आशंका व्यक्त की गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और आसपास के कई मकान इसकी चपेट में आ गए।
50 लाख से अधिक की क्षति,बच्ची घायल : प्रकरण में लगभग 50 से 55 लाख रुपये तक के नुकसान का उल्लेख किया गया है। घटना में एक बच्ची के घायल होने की बात भी रिकॉर्ड में दर्ज बताई गई है। आग लगने के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
न्यायालय ने मानी गंभीर लापरवाही : अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का प्रतीत होता है। आदेश में कहा गया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण अत्यंत खतरनाक है और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे थे। साथ ही अग्रिम जमानत मिलने की स्थिति में साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं आधारों पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी।
पहले भी उठ चुकी थी आपत्ति
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि मोहल्ले के लोगों द्वारा पूर्व में भी कथित रूप से पटाखा भंडारण को लेकर आपत्ति जताई गई थी। जानकारी के अनुसार इस संबंध में पहले भी कार्रवाई की बात सामने आई है। वहीं पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश के बाद मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस घटना ने अंबिकापुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी रिहायशी बस्तियों में ज्वलनशील पदार्थों के अवैध भंडारण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर अब प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी चर्चा तेज हो गई है। अब बड़ा प्रश्न यह है कि शहर में ऐसे और कितने स्थान हैं जहां नियमों के विपरीत खतरनाक सामग्री रखी जा रही है, और प्रशासन इनके विरुद्ध क्या कार्रवाई करेगा।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@ सरगुजा के बाद अब बस्तर की बारी?

Share अंचल ओझा का उद्योग और खनन विस्तार पर बड़ा सवाल‘विकास के नाम पर प्रकृति,संस्कृति …

Leave a Reply