जयपुर,07 मई 2026। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की नई रणनीतिक नीति का संकेत है। सेना ने दो टूक कहा कि अब पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है। जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड में गुरुवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति,उपलब्धियों और उसके प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। सेना ने इस अभियान को पिछले कई दशकों में पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का सबसे व्यापक और समन्वित सैन्य अभियान बताया। पत्रकार वार्ता में इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के डिप्टी चीफ (ऑपरेशन) लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशन एयर मार्शल अवधेश कुमार तथा डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशन वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ केवल नारा नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाली वास्तविक क्षमता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय सेना द्वारा उपयोग किए जा रहे 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित हो रहे हैं। राजीव घई ने कहा कि 7 मई, 2025 को शुरू हुए अभियान के दौरान भारतीय सेना ने सात और भारतीय वायु सेना ने दो प्रमुख आतंकी लक्ष्यों को निशाना बनाया था। इन कार्रवाइयों में आतंकवादी शिविरों को भारी क्षति पहुंची और 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई। उन्होंने दावा किया कि नियंत्रण रेखा पर बाद में हुई झड़पों में पाकिस्तान के 100 से अधिक सैनिक भी मारे गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक आतंकवादी ढांचे को सुरक्षित समझा, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा पूरी तरह तोड़ दी। आतंकवादी कैंपों का स्थान बदलते रहने और उन्हें सीमा से भीतर खिसकाने की कोशिशों के बावजूद भारतीय सेना की पहुंच और क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजीव घई ने प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा ‘सिर्फ हंगामा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। राजीव घई ने कहा कि भारत ने अपने स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के बाद संघर्ष को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों ने यह दिखाया है कि लंबे संघर्ष किस प्रकार विनाशकारी हो सकते हैं।
भारत ने संतुलित लेकिन तीव्र कार्रवाई के माध्यम से पाकिस्तान की जोखिम लेने की क्षमता और इच्छा दोनों को प्रभावित किया। एयर मार्शल अवधेश कुमार ने कहा कि भारत हमेशा ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत में विश्वास करता है, लेकिन जब शांति की इच्छा को कमजोरी समझा जाए और संयम को निष्कि्रयता माना जाए।
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