- आदान सामग्री भंडारण को लेकर कृषि अधिकारी संघ ने सौंपा ज्ञापन
- आदान भंडारण को लेकर कृषि अधिकारी संघ का ज्ञापन,समितियों में व्यवस्था की मांग
- शासन निर्देशों की अनदेखी पर नाराजगी,
- कृषि अधिकारियों ने उठाई आवाज
- बीज-खाद भंडारण को लेकर संघ
- सक्रिय, उप संचालक को सौंपा ज्ञापन
- वितरण व्यवस्था सुधारने की मांग,
- सहकारी समितियों को बनाया जाए केंद्र
- आदान सामग्री भंडारण पर उठे सवाल, संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
- कृषि विभाग में नियमों की अनदेखी? संघ ने सौंपा ज्ञापन
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर,21 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। जिले में कृषि आदान सामग्रियों के भंडारण और वितरण को लेकर एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं, छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ (जिला इकाई-एमसीबी) के प्रतिनिधिमंडल ने उप संचालक कृषि से मुलाकात कर इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा,ज्ञापन में विभागीय योजनाओं के तहत प्राप्त बीज, उर्वरक और कल्चर के भंडारण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। कृषि आदान सामग्रियों के भंडारण को लेकर उठी यह मांग सीधे तौर पर किसानों की सुविधा और पारदर्शिता से जुड़ी हुई है, अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी और प्रभावी कार्रवाई करता है। यदि मांगें पूरी होती हैं, तो इससे न केवल वितरण व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि किसानों को समय पर संसाधन मिलने से कृषि उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सहकारी समितियों में भंडारण की मांग-संघ ने मांग रखी कि सभी आदान सामग्रियों का भंडारण विकासखंड कार्यालयों के बजाय अनिवार्य रूप से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में किया जाए, उनका कहना है कि सहकारी समितियां ग्रामीण स्तर पर किसानों से सीधे जुड़ी होती हैं, जिससे सामग्री का वितरण अधिक सरल और प्रभावी हो सकता है, संघ के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में कई स्थानों पर सामग्री का भंडारण अन्य कार्यालयों में किया जा रहा है, जिससे किसानों को समय पर लाभ नहीं मिल पाता और वितरण प्रक्रिया प्रभावित होती है।
शासन के निर्देशों की अनदेखी पर चिंता-प्रतिनिधिमंडल ने उप संचालक का ध्यान संचालनालय कृषि, रायपुर द्वारा वर्ष 2018 में जारी निर्देशों की ओर आकर्षित किया, इन निर्देशों में स्पष्ट रूप से सहकारी समितियों में भंडारण सुनिश्चित करने की बात कही गई थी,इसके बावजूद कई स्थानों पर इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिसे लेकर संघ ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि नियमों की अनदेखी से न केवल प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, बल्कि किसानों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने का दावा- संघ का मानना है कि यदि भंडारण सहकारी समितियों में किया जाता है, तो इससे वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगी, किसानों को उनके नजदीकी केंद्रों पर समय पर खाद और बीज उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे कृषि कार्यों में देरी नहीं होगी,इसके साथ ही सामग्री की सुरक्षा और गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी,वर्तमान व्यवस्था में जहां सामग्री के रखरखाव को लेकर कई बार शिकायतें सामने आती हैं, वहीं सहकारी समितियों में बेहतर प्रबंधन की संभावना जताई गई है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल- इस अवसर पर संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे,इनमें प्रांतीय कार्यालयीन सचिव एवं जिलाध्यक्ष दीपक कुमार साहू,प्रांतीय प्रतिनिधि आशीष नामदेव, उपाध्यक्ष संजय अमलेश,जिला सचिव विकास चौरसिया,कोषाध्यक्ष सूरज सिंह भगत और मीडिया प्रभारी रामबिहारी लहरें सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
कृषि अधिकारियों को भी मिलेगी राहत
मैदानी स्तर पर कार्यरत कृषि अधिकारियों को भी इस व्यवस्था से राहत मिलने की बात कही गई है, संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान प्रणाली में अधिकारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और भौतिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,यदि भंडारण समितियों में किया जाता है, तो अधिकारियों का कार्यभार संतुलित होगा और वे अपने मुख्य कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
उप संचालक ने दिया सकारात्मक आश्वासन
उप संचालक कृषि ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया,उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसानों और विभाग दोनों को लाभ मिल सके।
संघ ने दी चेतावनी
संघ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए आगे रणनीति बनाने को बाध्य होगा, यह चेतावनी प्रशासन के लिए संकेत मानी जा रही है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो मामला और आगे बढ़ सकता है।
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