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सूरजपुर@ छात्र हित में बड़ा फैसला

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आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों पर हजारों छात्रों को मिले 7 बोनस अंक
सूरजपुर ,21 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
जिले में कक्षा चौथी की वार्षिक परीक्षा 2026 के हिंदी प्रश्नपत्र में सामने आई गंभीर त्रुटि के बाद शिक्षा विभाग ने छात्र हित में बड़ा और राहतभरा निर्णय लिया है,प्रश्नपत्र में आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए 7 अंकों के प्रश्नों को लेकर उठे विवाद के बाद अब जिले के सभी विद्यार्थियों को 7 बोनस अंक प्रदान करने के आदेश जारी किए गए हैं,इस निर्णय से हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिला है और परीक्षा परिणाम पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूरजपुर में आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों को लेकर सामने आया यह मामला अब एक सकारात्मक उदाहरण बन गया है,एक शिक्षक की सजग पहल और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि छात्र हित सर्वोपरि है,यह घटना न केवल व्यवस्था में सुधार का संकेत देती है, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए भी एक सीख के रूप में देखी जा रही है।
प्रश्नपत्र में सामने आई गंभीर त्रुटि
जानकारी के अनुसार, कक्षा चौथी के हिंदी प्रश्नपत्र में कुल 7 अंकों के तीन प्रश्न ऐसे पूछे गए थे, जो निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे, इतना ही नहीं, ये प्रश्न छत्तीसगढ़ी भाषा के पाठों से जुड़े थे,जबकि सूरजपुर जिला सरगुजा संभाग में आता है, जहां सरगुजिहा आधारित पाठ्यक्रम लागू है,इस विसंगति के कारण परीक्षा के दौरान छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति बनी रही और कई विद्यार्थियों को प्रश्न समझने में कठिनाई हुई,इसका सीधा असर उनके प्रदर्शन पर पड़ने की आशंका जताई गई।
प्रधान पाठक की पहल बनी बदलाव का कारण
इस पूरे मामले को शासकीय प्राथमिक शाला चट्टीडांड़ के प्रधान पाठक गौतम शर्मा ने गंभीरता से उठाया,उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, सूरजपुर को पत्र लिखकर इस त्रुटि की जानकारी दी और छात्रों के हित में तत्काल समाधान की मांग की,उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र में शामिल प्रश्न क्षेत्रीय पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं हैं और इससे विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो सकता है,साथ ही उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता भी बताई।
जांच में सही पाई गई शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने तुरंत जांच दल गठित किया, जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि प्रश्न वास्तव में निर्धारित पाठ्यक्रम और स्वीकृत पाठ्यपुस्तक के अनुरूप नहीं थे, जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि क्षेत्रीय भाषा आधारित पाठ्यक्रम की अनदेखी की गई, जो एक गंभीर शैक्षणिक त्रुटि है।
छात्र हित में 7 बोनस अंक देने का निर्णय
जांच के बाद शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्र हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया, आदेश जारी कर जिले के सभी विद्यार्थियों को संबंधित 7 अंकों को बोनस के रूप में प्रदान करने का निर्देश दिया गया, यह निर्णय न केवल छात्रों को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप कदम
विशेषज्ञों के अनुसार,यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा और स्थानीय भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है,ऐसे में क्षेत्रीय पाठ्यक्रम से हटकर प्रश्न पूछे जाना नीतिगत रूप से भी उचित नहीं था, जिसे अब सुधार लिया गया है।
हजारों विद्यार्थियों को मिला सीधा लाभ
इस फैसले से जिले के हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिला है,जिन विद्यार्थियों को आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों के कारण नुकसान हो सकता था,अब उनके अंकों में संतुलन आ सकेगा,अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय बच्चों के आत्मविश्वास को बनाए रखने में भी मदद करेगा।
शिक्षकों और अभिभावकों ने की सराहना
प्रधान पाठक गौतम शर्मा की सजगता और शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई की जिले भर में सराहना हो रही है, शिक्षकों,अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इसे एक सकारात्मक और न्यायसंगत पहल बताया है, लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह समय पर समस्याओं का समाधान होता रहा,तो शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और मजबूती आएगी।


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