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सोनहत/कोरिया,@ खबर का असर

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  • घुनघुट्टा रिसोर्ट से हटा ‘विभागीय ग्रहण’ अब आम जनता के लिए खुले ‘ट्री हाउस’ के दरवाजे
  • ट्री हाउस’ पर खत्म हुआ वीआईपी कल्चर,जनता के लिए खुले दरवाजे
  • घुनघुट्टा रिसोर्ट विवाद खत्म,अब ऑनलाइन बुकिंग से मिलेगी एंट्री
  • सोनहत का घुनघुट्टा रिसोर्ट अब ‘प्राइवेट विला’ नहीं,पब्लिक डेस्टिनेशन
  • वीआईपी कल्चर पर ब्रेक, घुनघुट्टा रिसोर्ट में अब सबका स्वागत
  • ऑनलाइन बुकिंग शुरू,अब बिना सिफारिश मिलेगा घुनघुट्टा रिसोर्ट में कमरा
  • घुनघुट्टा रिसोर्ट का ‘गेट बंद’ विवाद खत्म, ट्री हाउस अब सबके लिए
  • जनता की आवाज रंग लाई : घुनघुट्टा रिसोर्ट से हटा ‘विभागीय ग्रहण


-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,21 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
प्रकृति की गोद में बसे सोनहत क्षेत्र का बहुप्रतीक्षित घुनघुट्टा रिसोर्ट आखिरकार आम जनता के लिए खोल दिया गया है,पिछले कई महीनों से इस रिसोर्ट को लेकर जो विवाद, असमंजस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था, वह अब खत्म होता नजर आ रहा है। स्थानीय समाचार-पत्र ‘घटती-घटना’ में लगातार प्रकाशित खबरों,जनप्रतिनिधियों की सख्त आपत्तियों और जनता की नाराजगी के बाद पर्यटन विभाग हरकत में आया और अब इस रिसोर्ट के‘ट्री हाउस’ सहित सभी आवासीय सुविधाओं के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, यह वही रिसोर्ट है जिसे लेकर लंबे समय से यह आरोप लग रहे थे कि यह केवल रसूखदार लोगों के लिए ‘प्राइवेट विला’ बनकर रह गया है, जबकि आम पर्यटक गेट से ही लौटा दिए जाते थे,अब जब छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने इसकी दरें सार्वजनिक कर दी हैं और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी है, तो इसे सीधे तौर पर ‘खबर का असर’माना जा रहा है।
विवादों के बाद जागी व्यवस्था
घुनघुट्टा रिसोर्ट का निर्माण पर्यटन को बढ़ावा देने और सोनहत क्षेत्र को एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से किया गया था,जनवरी 2026 में इसका हैंडओवर होने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि यह जल्दी ही पर्यटकों के लिए खुल जाएगा। लेकिन अप्रैल तक भी आम लोगों के लिए इसके दरवाजे बंद रहे, जिससे कई सवाल खड़े होने लगे,स्थानीय लोगों का आरोप था कि रिसोर्ट में प्रवेश के लिए ‘ऊपर’ से अनुमति अनिवार्य थी, कई पर्यटक,जो दूर-दूर से यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंचे, उन्हें गेट से ही वापस कर दिया गया,इस व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती गई, राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमाया। भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र तिवारी और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र साहू,अनित दुबे, पुष्पेंद्र राजवाड़े सहित कई नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। उन्होंने इसे ‘तानाशाही संस्कृति’ करार देते हुए आम जनता के अधिकारों की अनदेखी बताया, लगातार दबाव और मीडिया की सक्रियता के बाद आखिरकार पर्यटन विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना पड़ा,जिसका परिणाम अब सामने है। सीजन के अनुसार तय की गई दरें- पर्यटन विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइन में रिसोर्ट की दरों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे अब पारदर्शिता की उम्मीद बढ़ी है।
प्री-वेडिंग और शूटिंग की सुविधा
पर्यटन को बढ़ावा देने और युवाओं को आकर्षित करने के लिए रिसोर्ट में प्री-वेडिंग शूट और वीडियो शूटिंग की सुविधा भी शुरू की गई है। इसके लिए 15,000 प्रति दिन (जीएसटी सहित) का शुल्क तय किया गया है, इस पैकेज में शूटिंग टीम को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक दो कमरे ‘फ्रेश एंड चेंज’ के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, जो उपलब्धता के आधार पर दिए जाएंगे, हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शूटिंग के दौरान अन्य पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए, यदि ऐसा होता है तो संबंधित टीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मिडिल क्लास की जेब पर भारी पड़ती दरें- हालांकि रिसोर्ट का खुलना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी दरों को लेकर आम जनता,खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों में असंतोष देखने को मिल रहा है, सोनहत जैसे क्षेत्र में,जहां ज्यादातर पर्यटक आसपास के जिलों से आते हैं और सीमित बजट में घूमने की योजना बनाते हैं, उनके लिए 2600 से 3800 तक का दैनिक किराया काफी महंगा माना जा रहा है,यदि इसमें खाने-पीने,यात्रा और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए,तो एक दिन का कुल खर्च कई परिवारों के बजट से बाहर हो जाता है। यही कारण है कि स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दरों में आंशिक कमी की जाए,स्थानीय निवासियों के लिए विशेष छूट दी जाए, ऑफ-सीजन में और अधिक किफायती पैकेज उपलब्ध कराए जाएं।
क्या केवल अमीरों तक सीमित रहेगा पर्यटन- यह सवाल अब भी चर्चा में है कि क्या यह रिसोर्ट वास्तव में सभी वर्गों के लिए सुलभ हो पाएगा या फिर केवल संपन्न वर्ग के लिए ही एक प्रीमियम डेस्टिनेशन बनकर रह जाएगा, पर्यटन का उद्देश्य केवल राजस्व कमाना नहीं,बल्कि अधिक से अधिक लोगों को प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ना भी होता है,यदि दरें इतनी अधिक हों कि आम आदमी वहाँ तक पहुंच ही न सके, तो इसका मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
नॉन-पीक सीजन (1 अप्रैल – 30 जून)
अवधि में सप्ताह के सभी दिनों के लिए एक समान दरें रखी गई हैं।
सिंगल ऑक्यूपेंसीः 2100
डबल ऑक्यूपेंसीः 2625
अतिरिक्त व्यक्ति के साथः 3150
पीक सीजन (1 जुलाई – 31 मार्च)
इस अवधि में सप्ताह के दिनों और वीकेंड के हिसाब से दरों में अंतर रखा गया है।
सोमवार से गुरुवार
सिंगलः 2625
डबलः 3150
अतिरिक्त व्यक्ति सहित : 3750
वीकेंड (शुक्रवार,शनिवार,रविवार)
सिंगलः 2835
डबलः 3360
अतिरिक्त व्यक्ति सहित : 3885

इन दरों के निर्धारण से यह साफ हो गया है कि रिसोर्ट अब एक व्यवस्थित व्यावसायिक मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा, न कि किसी विशेष वर्ग तक सीमित रहेगा।
ऑनलाइन बुकिंग से बढ़ी पारदर्शिता
इस पूरे बदलाव का सबसे अहम पहलू है—ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा। अब पर्यटकों को किसी सिफारिश, पहचान या ‘ऊपर’ के आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पर्यटक रियल-टाइम में कमरों की उपलब्धता देख सकते हैं,अपनी पसंद के अनुसार बुकिंग कर सकते हैं,डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं, इस व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भरोसा भी मजबूत होगा। साथ ही, सोनहत क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है-जैसे गाइड, परिवहन, खान-पान और अन्य सेवाएं।
बिना शोर-शराबे के शुरू हुआ संचालन
दिलचस्प बात यह रही कि इतने बड़े और बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का संचालन बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के शुरू कर दिया गया,न कोई फीता कटा, न कोई बड़ा समारोह हुआ और न ही जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया। विभाग ने चुपचाप ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग शुरू कर दी और रिसोर्ट को आम जनता के लिए खोल दिया, इसे कई लोग इस रूप में देख रहे हैं कि विभाग विवादों से बचना चाहता था या फिर यह सीधे तौर पर मीडिया के दबाव का परिणाम था, जो भी हो, यह साफ है कि यदि खबरें लगातार सामने नहीं आतीं, तो शायद यह रिसोर्ट अभी भी सीमित लोगों तक ही सिमटा रहता।
खबर की ताकत और जनदबाव का परिणाम
घुनघुट्टा रिसोर्ट का मामला यह साबित करता है कि मीडिया की सक्रियता, जनप्रतिनिधियों का दबाव और जनता की आवाज मिलकर व्यवस्था को बदलने की ताकत रखते हैं,आज जो रिसोर्ट आम लोगों के लिए खुला है, वह कुछ समय पहले तक केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित था। यह बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जनदबाव और जागरूकता का परिणाम है,अब जरूरत इस बात की है कि इस पारदर्शिता और जनहित की भावना को बनाए रखा जाए और दरों को भी इस तरह संतुलित किया जाए कि हर वर्ग का व्यक्ति इस खूबसूरत ‘ट्री हाउस’ का अनुभव ले सके, घुनघुट्टा रिसोर्ट अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यह एक उदाहरण बन गया है—कि जब सवाल उठते हैं, तो जवाब भी मिलते हैं।


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