Breaking News

रायपुर@नकली दवा कांड में चार महीने बाद गिरफ्तारी मीडिया दबाव में टूटी सिस्टम की चुप्पी….

Share

  • खुलासे से गिरफ्तारी तक ‘घटती-घटना’ की खबरों ने हिलाया नकली दवा नेटवर्क
  • दवा नहीं धोखा,लगातार खुलासों के बाद आखिरकार तीन आरोपी गिरफ्तार
  • चार महीने की देरी,एक्शन अब नकली दवा कांड में बड़े नाम गिरफ्त में…
  • इंदौर से छत्तीसगढ़ तक फैला नेटवर्क,खुलासों के बाद गिरफ्तारी तक पहुंचा मामला
  • पहले खुलासा,फिर सन्नाटा,अब गिरफ्तारी नकली दवा कांड की पूरी कहानी
  • एक बरामदगी से उठा तूफान…चार महीने बाद पहुंचा गिरफ्तारी तक…


-न्यूज डेस्क-
रायपुर,14 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं,बल्कि प्रशासनिक जवाब देही,जांच प्रक्रिया और सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला केस बन चुका है,दिसंबर 2025 में एक ट्रांसपोर्ट से संदिग्ध दवाओं की बरामदगी से शुरू हुआ यह मामला धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा करने लगा,जिसकी जड़ें राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैली हुई थीं,इंदौर से छत्तीसगढ़ तक फैले इस कथित सप्लाई नेटवर्क में सरस्वती मेडिकोज,प्रेम प्रकाश मेडिकल एजेंसी और मां बिजासन ट्रेडिंग कंपनी जैसे नाम सामने आए, शुरुआती कार्रवाई में नेटवर्क की संरचना तो उजागर हो गई,लेकिन इसके बाद अपेक्षित तेजी से कार्रवाई नहीं हुई,चार महीनों तक यह मामला जांच,नोटिस और विभागीय प्रक्रियाओं में उलझा रहा,जबकि मुख्य आरोपी खुले घूमते रहे,इसी दौरान स्थानीय अखबार दैनिक घटती-घटना ने इस पूरे मामले को लगातार प्रमुखता से उठाया,खबरों में न केवल नेटवर्क की परतें उजागर की गईं, बल्कि कार्रवाई में देरी, विभागीय निष्कि्रयता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। धीरे-धीरे यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ने लगा, अंततः अप्रैल 2026 में तीन प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हुई,यह गिरफ्तारी केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि चार महीनों तक चले खुलासों, सवालों और निरंतर मीडिया दबाव का परिणाम मानी जा रही है।
10 दिसंबर 2025 को हुआ खुलासा, 13 अप्रैल 2026 गिरफ्तारी
10 दिसंबर 2025 को औषधि एवं खाद्य नियंत्रक के निर्देश पर गठित टीम द्वारा गोल्डन ट्रांसपोर्ट से संदिग्ध दवाओं की जब्ती के बाद यह मामला सामने आया, जांच में यह सामने आया कि दवाएं इंदौर से भेजी गई थीं और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से वितरित हो रही थीं,शुरुआती कार्रवाई ने नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दीं, लेकिन इसके बाद जो होना चाहिए था,त्वरित गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई वह नहीं हुआ, चार महीनों तक यह मामला जांच, नोटिस और कागजी प्रक्रिया में उलझा रहा, इस दौरान कई सवाल उठे मुख्य आरोपी खुले क्यों हैं, विभागीय कार्रवाई धीमी क्यों है, और क्या सिस्टम के भीतर कोई दबाव काम कर रहा है? इसी बीच लगातार मीडिया रिपोर्टिंग ने इस मुद्दे को जीवित रखा और जन-चर्चा का विषय बनाए रखा, अंततः अप्रैल 2026 में जाकर तीन प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिससे यह संकेत मिला कि मामला आगे बढ़ा है, लेकिन यह गिरफ्तारी जितनी महत्वपूर्ण है,उतने ही महत्वपूर्ण वे सवाल हैं जो इस पूरे घटनाक्रम ने खड़े किए हैं,यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 से लेकर अब तक की पूरी प्रक्रिया को क्रमवार तरीके से प्रस्तुत करती है।
चार महीने बाद गिरफ्तारी : तीन आरोपियों पर शिकंजा
अप्रैल 2026 में इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया,खेमराम बनी-सरस्वती मेडिकोज,सुरेंद्र कामनानी-प्रेम प्रकाश मेडिकल एजेंसी,रोचक अग्रवाल-मां बिजासन ट्रेडिंग कंपनी, बताया जा रहा है कि आरोपियों को नोटिस देकर बुलाया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
पहली कार्रवाई : 10 दिसंबर 2025 को हुआ खुलासा
नकली दवा कांड का पहला संकेत 10 दिसंबर 2025 को मिला, जब औषधि एवं खाद्य नियंत्रक दीपक अग्रवाल के निर्देश पर एक टीम गठित की गई। इस टीम में सहायक औषधि नियंत्रक संजय नेताम को शामिल किया गया,जांच के दौरान गोल्डन ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड से दवाओं की एक खेप जब्त की गई,प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि दवाओं की गुणवत्ता संदिग्ध है और मामला सामान्य नहीं है। यही वह बिंदु था, जहां से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
लैब जांच में खुलासा : ‘दवा’ या सिर्फ नाम?
जब्त दवाओं के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया, जहां कुछ सैंपल ‘हृशह्ल शद्घ स्ह्लड्डठ्ठस्रड्डह्म्स्र क्तह्वड्डद्यद्बह्ल4’ पाए गए,कुछ मामलों में सक्रिय तत्व की मात्रा बेहद कम या नगण्य पाई गई, यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं था,बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर जोखिम का मामला था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में ऐसी दवाएं पहुंच रही थीं,जिनका वास्तविक प्रभाव संदिग्ध था।
कार्रवाई के बाद ठहरावः चार महीने तक क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी?
दिसंबर 2025 की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी होगी,लेकिन ऐसा नहीं हुआ, चार महीनों तक मामला जांच और नोटिस तक सीमित रहा, इस दौरान मुख्य आरोपी खुले रहे और विभागीय सक्रियता पर सवाल उठते रहे। यह स्थिति जांच प्रक्रिया की गति और प्रभावशीलता दोनों पर सवाल खड़े करती है।
संजय नेताम प्रकरणः कार्रवाई करने वाला अधिकारी ही निलंबित
इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया,जब कार्रवाई करने वाले सहायक औषधि नियंत्रक संजय नेताम को निलंबित कर दिया गया,सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के बाद एक आरोपी उनसे मिलने आया था और इसी घटना को आधार बनाकर यह कदम उठाया गया। हालांकि यह घटना कार्रवाई के बाद की थी,लेकिन इससे पूरे मामले की दिशा प्रभावित हुई और जांच की गति पर असर पड़ा।
सूत्रों का दावाः निलंबन के बाद धीमी पड़ी कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि यदि संजय नेताम इस पूरे मामले को आगे भी संभालते रहते, तो कार्रवाई काफी पहले पूरी हो जाती, बताया जा रहा है कि उनके निलंबन के बाद मामला जिन अधिकारियों के पास गया, वहां से कार्रवाई की गति धीमी हो गई और निर्णय लेने में देरी हुई।
सप्लाई चेन का खुलासा : इंदौर से छत्तीसगढ़ तक नेटवर्क
जांच में सामने आया कि जब्त दवाएं इंदौर स्थित मां बिजासन ट्रेडिंग कंपनी से भेजी गई थीं, इन्हें सरस्वती मेडिकोज (सारंगढ़-रायगढ़) के लिए ट्रांसपोर्ट किया जा रहा था,जबकि प्रेम प्रकाश मेडिकल एजेंसी (भाटापारा) का भी इस नेटवर्क से संबंध पाया गया, इस प्रकार एक स्पष्ट सप्लाई चेन सामने आई,जिसमें बाहरी सप्लायर,ट्रांसपोर्टर और स्थानीय वितरक शामिल थे, इससे यह साफ हुआ कि मामला किसी एक दुकान तक सीमित नहीं,बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
बेणीराम साहू और नीरज साहू पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बेणीराम साहू और नीरज साहू की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, बताया जा रहा है कि ये वही अधिकारी हैं जिनके लाइसेंस अथॉरिटी क्षेत्र—भाटापारा और सारंगढ़—में यह नेटवर्क सक्रिय था, समय पर कार्रवाई होती तो मामला पहले ही नियंत्रित हो सकता था।
निरीक्षण पर संदेहः छुट्टी के दिन कार्रवाई क्यों ?
सूत्रों के मुताबिक,औषधि निरीक्षक नीरज साहू द्वारा छुट्टी के दिन किया गया निरीक्षण भी संदेह के घेरे में है,यह सवाल उठाया जा रहा है कि निरीक्षण की टाइमिंग क्या उचित थी? क्या इससे पहले नियमित कार्रवाई नहीं की जा सकती थी?
श्रेय की राजनीतिः अब किसे मिलेगा क्रेडिट ?
गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में श्रेय को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है,जहां प्रारंभिक कार्रवाई का श्रेय दीपक अग्रवाल और संजय नेताम की टीम को दिया जा रहा है,वहीं वर्तमान कार्रवाई का श्रेय अन्य अधिकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।
जन-स्वास्थ्य पर खतरा : अदृश्य लेकिन गंभीर प्रभाव
नकली दवाओं का असर केवल आर्थिक नहीं,बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा है,ऐसी दवाओं के उपयोग से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पाता और बीमारी गंभीर हो सकती है।
दैनिक घटती-घटना
के खबर असर : खबर से बना दबाव

इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय अखबार दैनिक घटती-घटना की भूमिका निर्णायक रही, अखबार ने लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया,सरस्वती मेडिकोज,प्रेम प्रकाश एजेंसी और मां बिजासन के बीच संबंधों को उजागर किया,कार्रवाई में हो रही देरी और विभागीय निष्कि्रयता पर सवाल उठाए, लगातार खबरों में यह भी सामने लाया गया कि शुरुआती कार्रवाई के बाद भी नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ था,बल्कि परोक्ष रूप से सक्रिय बना रहा, इन खबरों का प्रभाव यह हुआ कि मामला जनचर्चा का विषय बन गया और प्रशासन पर दबाव बढ़ने लगा,सूत्रों के अनुसार,यही दबाव अंततः कार्रवाई को आगे बढ़ाने का कारण बना और गिरफ्तारी तक मामला पहुंचा।
ट्रांसपोर्ट कड़ी अब भी बाकी
हालांकि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है,लेकिन गोल्डन ट्रांसपोर्ट की भूमिका अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है,यह कड़ी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है और आगे की कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी।
खबर…दबाव और कार्रवाई का संगम
दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक का यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि प्रारंभिक कार्रवाई ने नेटवर्क का खुलासा किया, लेकिन कार्रवाई अधूरी रह गई,लगातार खबरों और दबाव के बाद ही गिरफ्तारी संभव हुई,यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि जब पत्रकारिता लगातार और तथ्यात्मक रूप से किसी मुद्दे को उठाती है, तो वह न केवल सच सामने लाती है,बल्कि व्यवस्था को सक्रिय करने की क्षमता भी रखती है।
सूत्रों के दावेः कार्रवाई और विभागीय भूमिका पर उठे सवाल (चार प्रमुख बिंदु)

  1. कार्रवाई की गति निलंबन के बाद हुई धीमी- सूत्रों का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच करने वाले अधिकारी संजय नेताम ही इस पूरे प्रकरण को संभालते रहते,तो कार्रवाई काफी पहले पूरी हो जाती,उनके निलंबन के बाद मामला अन्य अधिकारियों के पास गया,जहां से कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के आरोप लग रहे हैं।
  2. बेणीराम साहू और नीरज साहू पर उठे सवाल- बताया जा रहा है कि जिन क्षेत्रों-भाटापारा और सारंगढ़-में यह पूरा नेटवर्क सक्रिय था,वहां की लाइसेंस अथॉरिटी से जुड़े अधिकारी बेणीराम साहू और नीरज साहू की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं,सूत्रों के अनुसार, समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो मामला पहले ही नियंत्रित हो सकता था।
  3. निरीक्षण की टाइमिंग और कार्यप्रणाली पर संदेह- सूत्रों के मुताबिक,औषधि निरीक्षक नीरज साहू द्वारा छुट्टी के दिन किया गया निरीक्षण भी संदेह के घेरे में रहा, यह भी कहा जा रहा है कि यदि नियमित और प्रभावी निरीक्षण किया जाता,तो प्रेम प्रकाश एजेंसी के अचानक बंद होने और गतिविधियों के गायब होने जैसी स्थिति नहीं बनती।
  4. श्रेय की होड़ और एकतरफा नाम उभरना- गिरफ्तारी के बाद अब कार्रवाई का श्रेय लेने की स्थिति बन रही है,सूत्रों के अनुसार, जिस कार्रवाई की शुरुआत संजय नेताम ने की,उसी के अंतिम परिणाम का श्रेय अब अन्य अधिकारियों,विशेषकर बेणीराम साहू,द्वारा लिया जा रहा है, जबकि बाकी जिम्मेदार भूमिकाएं अब भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई हैं।

Share

Check Also

बलरामपुर@ फर्जी निवास प्रमाण पत्र रैकेट का पर्दाफाश

Share छत्तीसगढ़ कोटे से केंद्रीय बलों में भर्ती कराने वाला गिरोह बेनकाब,मुख्य आरोपी समेत 4 …

Leave a Reply