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प्रतापपुर@अधिकारियों का चारागाह बना भैंसामुंडा पुल

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ठेकेदार की मनमानी का खुला खेल’
भैंसामुंडा महानदी पुल मरम्मत घोटालाः लाखों खर्च, डेढ़ महीने में उखड़ा सच
-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर,13 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)
। प्रतापपुर-अंबिकापुर-वाराणसी मुख्य मार्ग पर स्थित भैंसामुंडा महानदी पुल एक बार फिर भ्रष्टाचार और लापरवाही की बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। लाखों रुपये की लागत से हाल ही में कराई गई मरम्मत अब महज डेढ़ महीने में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। पुल की सड़क परत जगह-जगह से उखड़ने लगी है,जिससे साफ जाहिर होता है कि मरम्मत कार्य केवल कागजों में मजबूत और जमीनी स्तर पर बेहद कमजोर था।
लाखों खर्च, काम आधा अधूरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक,मरम्मत के लिए भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन कार्य पुल के आधे हिस्से तक ही सीमित रहा। कई स्थानों पर गड्ढे जस के तस छोड़ दिए गए, जिससे साफ संकेत मिलता है कि काम को जल्दबाजी में निपटाकर राशि का बंदरबांट किया गया।
घटिया सामग्री से तैयार ‘कमजोर पुल’
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मरम्मत में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि डेढ़ महीने के भीतर ही पुल की परत उखड़ने लगी। यह न केवल तकनीकी लापरवाही है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा गंभीर मामला है।
इंजीनियरों की निगरानी पर सवाल : पूरा मामला विभागीय इंजीनियरों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि निर्माण कार्य की सही मॉनिटरिंग होती, तो इतनी जल्दी पुल की स्थिति खराब नहीं होती। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि ठेकेदार और अधिकारियों के बीच मिलीभगत से यह खेल खेला गया।
मुख्य मार्ग, रोज हजारों की आवाजाही : यह पुल प्रतापपुर-अंबिकापुर-वाराणसी मार्ग का एकमात्र महत्वपूर्ण संपर्क है, जहां से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है।
जनता में आक्रोश, जांच की मांग तेज : क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि ‘रिपेयरिंग के नाम पर सिर्फ पैसे हजम किए गए हैं,जबकि पुल पहले से भी अधिक खतरनाक हो गया है।’ ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
‘पुल नहीं, भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया भैंसामुंडा ‘ः जिस पुल को मजबूत बनाने के दावे किए गए थे, वही आज भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण बन गया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता की मेहनत की कमाई इस तरह से लूटी जाती रहेगी और जिम्मेदार लोग बेखौफ बने रहेंगे? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा।


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