- गर्मी से पहले सूखने लगे हैंडपंप, एमसीबी में जलस्तर गिरने से बढ़ी चिंता
- भू-जल का अंधाधुंध दोहन, एमसीबी जिले में गहराता जल संकट
- रातों-रात हो रहा अवैध बोर खनन, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा संकट
- जलस्तर में गिरावट से हाहाकार के संकेत, एमसीबी में हालात बिगड़ने की आशंका
- मई-जून से पहले ही पानी की किल्लत, एमसीबी में संकट के आसार
-रवि सिंह-
एमसीबी/ खड़गवां,11 अप्रैल 2026(घटती-घटना)। जिले में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जल संकट के संकेत तेजी से उभरने लगे हैं,अभी अप्रैल का महीना चल रहा है और गर्मी अपने चरम पर भी नहीं पहुंची है,लेकिन इसके बावजूद कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है,हैंडपंपों से पानी कम निकल रहा है, कुओं का जल स्तर घटता जा रहा है और कई स्थानों पर लोगों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच जिले में अवैध बोर खनन की बढ़ती गतिविधियां स्थिति को और अधिक गंभीर बना रही हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि जल संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है,प्रशासन और आम जनता दोनों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा, यदि समय रहते सख्त कदम उठाए गए तो स्थिति को संभाला जा सकता है, अन्यथा आने वाले समय में एमसीबी जिले के लिए जल संकट एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
गर्मी की शुरुआत में ही बिगड़ने लगे हालात
जिले के विभिन्न हिस्सों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस वर्ष जलस्तर में गिरावट सामान्य से पहले ही शुरू हो गई है। जहां पहले गर्मी के मध्य या अंत में जल संकट के हालात बनते थे,वहीं इस बार अप्रैल में ही पानी की कमी साफ दिखाई देने लगी है, कई गांवों में हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है और पानी भरने में अधिक समय लग रहा है, कुएं भी धीरे-धीरे सूखने की स्थिति में पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
कहां-कहां हो रहा अवैध बोर खनन
जिले के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिना अनुमति के बोर खनन का कार्य तेजी से जारी है,स्थानीय लोगों के अनुसार बोरिंग मशीनों के जरिए गहराई तक बोर किए जा रहे हैं, रात के समय भी कई स्थानों पर बोरिंग मशीनें चलती देखी जा रही हैं,जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों को नजरअंदाज कर अवैध रूप से यह काम किया जा रहा है, निजी उपयोग के लिए लगातार नए बोर करवाए जा रहे हैं, जिससे भू-जल पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
कितना गिरा जलस्तर,क्या कह रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है,जहां पहले कम गहराई में पानी उपलब्ध हो जाता था, अब वहां अधिक गहराई तक बोर करना पड़ रहा है,कई हैंडपंपों में पानी का दबाव कम हो गया है और कुछ स्थानों पर पानी आना लगभग बंद होने की स्थिति में है,यदि यही स्थिति बनी रही, तो मई और जून के महीनों में पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
भू-जल का अंधाधुंध दोहन बना बड़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित बोर खनन और बढ़ते तापमान के कारण भू-जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, बार-बार गहरे बोर करने से जमीन के अंदर का जल स्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे प्राकृतिक जल संतुलन प्रभावित होता है, भू-जल का पुनर्भरण पर्याप्त नहीं हो पा रहा है,जिससे आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है, इसका असर न केवल पेयजल पर बल्कि खेती-किसानी पर भी पड़ेगा।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती परेशानी
जिले के कई गांवों में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है,सुबह और शाम के समय हैंडपंपों पर भीड़ लग रही है और पानी भरने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है,महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है,जिन्हें रोजाना पानी लाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती नजर आ रही है,जहां पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं, लोगों का कहना है कि अवैध बोर खनन पर निगरानी क्यों नहीं हो रही, बिना अनुमति चल रही बोरिंग मशीनों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, जलस्तर गिरने से रोकने के लिए क्या ठोस योजना बनाई गई है, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण ही अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।
क्या हो सकते हैं समाधान
जल संकट से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कई उपाय सुझाए हैं, सबसे पहले अवैध बोर खनन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, नए बोर के लिए अनुमति प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए,वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना होगा ताकि भू-जल का पुनर्भरण हो सके, इसके अलावा जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना भी बेहद आवश्यक है, सरकार और प्रशासन को मिलकर दीर्घकालिक योजना बनानी होगी ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या से बचा जा सके।
समय रहते नहीं हुई कार्रवाई तो संकट तय
एमसीबी जिले में जलस्तर गिरने और अवैध बोर खनन की स्थिति एक गंभीर चेतावनी है,यदि अभी भी इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जिले को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है,पेयजल की कमी से लोगों का जीवन प्रभावित होगा और कृषि व्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा।
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