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बिलासपुर@स्टे के बावजूद फैसला : फैमिली कोर्ट की ‘जिद’ पर हाईकोर्ट सख्त,आदेश किया रद्द

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बिलासपुर,08 अप्रैल 2026। न्यायिक अनुशासन के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए रायगढ़ फैमिली कोर्ट के एक आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित समय के प्रेसिडिंग ऑफिसर को शो-कॉज नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। यह मामला रायगढ़ फैमिली कोर्ट में चल रहे एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट स्टाफ और प्रतिवादी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए केस को किसी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि सुनवाई में जानबूझकर देरी की जा रही थी और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे थे। हाईकोर्ट ने 10 मार्च 2026 को इस मामले की सुनवाई के दौरान सिविल सूट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी थी। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने न केवल 10 मार्च बल्कि 12 मार्च को भी सुनवाई जारी रखी। इतना ही नहीं, स्टे की जानकारी होने के बाद भी कोर्ट ने भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का आदेश पारित कर दिया और याचिकाकर्ता के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां भी कीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी जाती है, तो निचली अदालत को आगे सुनवाई करने का कोई अधिकार नहीं रहता।
ऐसे में फैमिली कोर्ट की कार्यवाही न्यायिक मर्यादा के खिलाफ मानी गई। हाईकोर्ट ने 10 और 12 मार्च को पारित सभी आदेशों को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि संबंधित अधिकारी से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण लिया जाए कि स्टे के बावजूद सुनवाई क्यों जारी रखी गई। यह रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश की जाएगी। चूंकि संबंधित प्रेसिडिंग ऑफिसर का तबादला हो चुका है और नए अधिकारी ने पदभार संभाल लिया है, इसलिए हाईकोर्ट ने ट्रांसफर याचिका को निरर्थक मानते हुए निराकृत कर दिया है।


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