

- कोरिया कांग्रेस में उभरता चेहरा : अशोक जायसवाल की बढ़ती स्वीकार्यता ने बदले सियासी समीकरण
- गुटबाजी के दौर में एकजुटता की कोशिश,कोरिया में अशोक जायसवाल पर बढ़ा भरोसा
- सरल स्वभाव,मजबूत पकड़,क्यों बढ़ रही है अशोक जायसवाल की लोकप्रियता
- 2028 से पहले कांग्रेस में हलचल,कोरिया में अशोक जायसवाल बने केंद्र बिंदु
- धोखे के बाद भी वफादारी का फल,कांग्रेस में मजबूत हो रहे अशोक जायसवाल
- जनसंपर्क, सक्रियता और सरलता,अशोक जायसवाल की राजनीति का नया मॉडल
- कोरिया कांग्रेस को मिला नया चेहरा या फिर अस्थायी लहर?
- बैकुंठपुर में बदलते समीकरण, अशोक जायसवाल की सक्रियता से बढ़ी उम्मीदें
- हर कार्यक्रम में मौजूदगी,हर दिल में जगह,अशोक जायसवाल की बढ़ती पकड़
- गुटबाजी से एकजुटता तक : कोरिया कांग्रेस में बदलाव की कहानी
- क्या 2028 की तैयारी में सबसे आगे हैं अशोक जायसवाल?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,04 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की राजनीति इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है,लंबे समय से गुटबाजी, निष्कि्रयता और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही कांग्रेस पार्टी में अब एक नई हलचल देखने को मिल रही है,इस हलचल के केंद्र में हैं अशोक जायसवाल,जिनकी स्वीकार्यता पार्टी के भीतर और बाहर दोनों स्तर पर तेजी से बढ़ती दिख रही है,यह बदलाव अचानक नहीं है,बल्कि इसके पीछे कई राजनीतिक,सामाजिक और व्यक्तिगत कारण जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि आज कोरिया कांग्रेस की चर्चा में सबसे प्रमुख नाम अशोक जायसवाल का बन गया है।
सरलता और सहजता राजनीतिक पूंजी का आधार
राजनीति में अक्सर बड़े पद,संसाधन और संगठनात्मक ताकत को सफलता का आधार माना जाता है,लेकिन कई बार व्यक्तित्व ही सबसे बड़ा हथियार बन जाता है, अशोक जायसवाल के मामले में यही बात सामने आती है,उनका सरल स्वभाव,सहज व्यवहार और बिना किसी दिखावे के लोगों के बीच पहुंचने की शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। वे न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं बल्कि आम जनता के बीच भी आसानी से संवाद स्थापित कर लेते हैं,ग्रामीण इलाकों में जहां नेता और जनता के बीच दूरी एक बड़ी समस्या बन जाती है,वहां अशोक जायसवाल का सीधा संवाद उन्हें लोकप्रिय बना रहा है। लोग उन्हें ‘अपने बीच का नेता’ मानने लगे हैं।
जनसंपर्क अभियानः रणनीति या स्वभाव?
अशोक जायसवाल की बढ़ती सक्रियता को केवल राजनीतिक रणनीति कहना पूरी तरह सही नहीं होगा, यह उनके स्वभाव का भी हिस्सा है, वे लगातार क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं, छोटे-बड़े कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और लोगों से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं, धार्मिक आयोजनों से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों तक उनकी उपस्थिति लगातार देखी जा रही है, दुर्गा पूजा, कथा कार्यक्रम,सामाजिक बैठकें और हाल ही में हनुमान जयंती के अवसर पर उन्होंने लगभग पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई,यह सक्रियता केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनका जनसंपर्क वास्तविक रूप से मजबूत हो रहा है।
भौगोलिक स्थिति और जनसंपर्क की सहजता
बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी एक महत्वपूर्ण कारक है, यह क्षेत्र ऐसा है जहां अपेक्षाकृत कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है,अशोक जायसवाल इस स्थिति का प्रभावी उपयोग करते नजर आ रहे हैं, वे कम समय में अधिक से अधिक गांवों और क्षेत्रों में पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं,जिससे उनका जनसंपर्क तेजी से बढ़ रहा है।
अन्य नेताओं से अलग छवि
राजनीति में छवि का बहुत महत्व होता है, अशोक जायसवाल की छवि एक शांत, स्थिर और सहज नेता की बन रही है,वे बिना किसी आक्रामक बयानबाजी के अपनी बात रखते हैं और विवादों से दूर रहने की कोशिश करते हैं, उनकी यह शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है, जहां अक्सर आक्रामक राजनीति देखने को मिलती है।
एकजुटता कितनी स्थायी?
हालांकि वर्तमान में कांग्रेस एकजुट नजर आ रही है, लेकिन यह एकजुटता कितनी स्थायी होगी, यह एक बड़ा सवाल है,राजनीति में चुनाव नजदीक आते ही गुटबाजी का उभरना आम बात है,ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अशोक जायसवाल इस एकजुटता को कितने समय तक बनाए रख पाते हैं,यदि वे इसमें सफल होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत होगा।
विपरीत परिस्थितियों में भी वफादारी
राजनीति में निष्ठा अक्सर परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है,लेकिन अशोक जायसवाल ने इसके विपरीत उदाहरण प्रस्तुत किया है,नगर पालिका चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर हुए मतभेद और कथित धोखे के बावजूद उन्होंने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा,उस समय यह माना गया कि यदि वे चाहते तो अलग रास्ता चुन सकते थे,लेकिन उन्होंने संगठन के साथ बने रहने का निर्णय लिया,यह निर्णय आज उनके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी साबित हो रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता दोनों ही इस बात को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं कि कठिन समय में भी उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखी।
गुटबाजी से जूझती कांग्रेस और नई उम्मीद…
कोरिया जिले में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी का शिकार रही है, अलग-अलग समूहों में बंटी पार्टी कई बार चुनावी मैदान में कमजोर साबित हुई,2023 के विधानसभा चुनाव में बैकुंठपुर सीट पर कांग्रेस को मिली करारी हार ने इस गुटबाजी को और उजागर कर दिया। यह हार केवल चुनावी पराजय नहीं थी, बल्कि संगठन की कमजोरी का भी संकेत थी,ऐसे समय में अशोक जायसवाल का उभरना पार्टी के लिए एक नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है,वे लगातार सभी गुटों को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं और फिलहाल इसमें उन्हें सफलता भी मिलती नजर आ रही है।
युवा कांग्रेस का समर्थन
राजनीति में युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और जो नेता युवाओं को साथ जोड़ने में सफल होता है, वह लंबे समय तक प्रभावी बना रहता है, अशोक जायसवाल के साथ युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है,वे न केवल कार्यक्रमों में उनके साथ मौजूद रहते हैं,बल्कि जनसंपर्क अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, इससे यह संकेत मिलता है कि उनकी स्वीकार्यता केवल वरिष्ठ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा वर्ग भी उन्हें पसंद कर रहा है।
2028 चुनाव की तैयारी के संकेत
हालांकि विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होती नजर आ रही हैं,अशोक जायसवाल की बढ़ती सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है,बैकुंठपुर विधानसभा से उनकी दावेदारी की चर्चा भी तेज हो चुकी है,उनकी लगातार मौजूदगी,संगठन को मजबूत करने के प्रयास और जनसंपर्क अभियान यह संकेत देते हैं कि वे चुनावी तैयारी में जुट चुके हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सक्रियता इसी तरह बनी रहती है, तो वे पार्टी के मजबूत दावेदारों में शामिल हो सकते हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
अशोक जायसवाल के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं,पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ सकती है, गुटबाजी फिर से उभर सकती है,विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियां भी प्रभाव डाल सकती हैं,इन सभी चुनौतियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना उनके लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
क्या कांग्रेस को मिल गया नया चेहरा?
कोरिया जिले की राजनीति में अशोक जायसवाल की बढ़ती स्वीकार्यता एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, उनकी सरलता, वफादारी, सक्रियता और जनसंपर्क ने उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है,यदि वे पार्टी को एकजुट रखने और अपनी सक्रियता को बनाए रखने में सफल रहते हैं,तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकते हैं,फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कोरिया कांग्रेस में बदलाव की बयार चल चुकी है और इस बदलाव के केंद्र में अशोक जायसवाल का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहा है।
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