अम्बिकापुर,26 मार्च 2026 (घटती-घटना)। प्रजापिता ब्रर्ह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय अंबिकापुर केंद्र में आज विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक विभूति, राजयोगिनी एवं पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी जी का पुण्य स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरगुजा संभाग की संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी एवं ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा दादी जानकी जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित ब्राह्मण भाई-बहनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कहा कि दादी जानकी जी का जीवन तपस्या, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक शक्ति का अद्वितीय संगम था। सन् 1916 में सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) के हैदराबाद में जन्मी दादी जी ने 104 वर्षों तक आत्मिक स्थिति में स्थित रहते हुए संपूर्ण विश्व को राजयोग, शांति और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। उन्होंने न केवल ज्ञान का प्रकाश फैलाया, बल्कि अपने दिव्य गुणों के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान की। वे सच्चाई, स्वच्छता और सादगी की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं।
विद्या दीदी ने दादी जी की अमूल्य शिक्षाओं को साझा करते हुए कहा…सेवा में ‘डबल लाइट’ रहना ही सच्ची सेवा है। सच्चाई, स्वच्छता और सेवाभाव से ही परमात्मा का सच्चा प्यार मिलता है। स्वमान में स्थित रहकर दूसरों को सम्मान देने से ही सच्चे प्रेम की प्राप्ति होती है। नम्रता और सत्यता जीवन को सफल और सटीक बनाती है। सकारात्मक सोच ही स्थायी खुशी का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था के विस्तार, सशक्त संचालन एवं वैश्विक पहचान में दादी जानकी जी का योगदान अतुलनीय एवं प्रेरणादायक है। उल्लेखनीय है कि दादी जानकी जी ने 27 मार्च 2020 को उच्च आध्यात्मिक अवस्था में शांतिपूर्वक देह त्याग कर परमधाम की ओर प्रस्थान किया, किंतु उनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक मूल्य आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित भाई-बहनों ने सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित कर ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया तथा उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।
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