- तमिलनाडु से लाए श्रीराम यंत्र की स्थापना की…मंदिर परिसर देखा…
- रामराज्य के आदर्शों से ही नैतिक और
- धर्माचरण आधारित राष्ट्र निर्माण संभव : राष्ट्रपति
अयोध्या,19 मार्च 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। उन्होंने कहा कि रामराज्य के आदर्शों के पालन से ही नैतिक और धर्माचरण आधारित राष्ट्र निर्माण हो सकता है। राष्ट्रपति मुर्मु गुरुवार को अयोध्या में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के बाद देश की जनता को संबोधित कर रहीं थीं। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इसी अयोध्या यानी अवधपुरी और आस-पास की लोक-भाषा में संत कवि तुलसीदासजी ने ‘श्री रामचरितमानस’ की रचना की थी। रामचरितमानस में प्रभु श्रीराम सीताजी से कहते हैं कि यद्यपि सबने वैकुंठ का बखान किया है तथा वह वेद पुराणों में वर्णित है, जग-प्रसिद्ध है, लेकिन वैकुंठ भी मुझे अवधपुरी जितना प्रिय नहीं है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या के राम मंदिर पहुंचीं। उन्होंने रामलला के दर्शन किए। दूसरे फ्लोर पर बने राम दरबार में श्रीराम यंत्र की स्थापना की। उन्होंने राम मंदिर परिसर को भी देखा। सीएम योगी ने राष्ट्रपति को मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने कहा…अयोध्या में प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया था। इस पवित्र भूमि पर कदम रखना ही मेरे लिए सौभाग्य की बात है। राष्ट्रपति करीब साढ़े 10 बजे दिल्ली से अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं। यहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम ने उनका स्वागत किया।
सीएम योगी बोले…देश में आज राम राज्य
योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- देश में आज राम राज्य है। दुनिया के तमाम देशों में आज उथल-पुथल मची हुई है। युद्ध चल रहा है। जबकि भारत में शांति है। हम यहां शान्तिपूर्वक श्रीराम यंत्र की स्थापना कर रहे हैं। ये नया और बदलता हुआ भारत है। उन्होंने कहा- लोग पहले कहते थे ये दिगभम्रित भारत है, लेकिन ऐसा नहीं है। भारत आज दुनिया के तमाम देशों को दिशा दिखाने का काम कर रहा है। आज लोग नया साल मनाने के लिए बाहर कम मंदिरों में अधिक जाते हैं। राम मंदिर निर्माण में जिन राम भक्तों ने अपनी आहुति दी है। उनको मैं यहां से नमन करना हूं। उन्होंने कहा- जिस आस्था को पहले अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो यूपी या देश की सत्ता में रहते थे। अपनी सत्ता को बचाने के लिए वे नोएडा नहीं जाते थे, वह उनके लिए अंधविश्वास और रूढि़वादी नहीं था। लेकिन, राम मंदिर की बात करना, काशी में काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की बात करना और मथुरा वृंदावन की बात करना, उनके लिए अंधविश्वास का पर्याय था।
राष्ट्रपति बोलीं…राम जन्मभूमि
पर कदम रखना सौभाग्य की बात
राष्ट्रपति ने कहा- अयोध्या में प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया था। इस पवित्र भूमि पर कदम रखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भगवान राम ने अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया था। अयोध्या नगरी सभी राम भक्तों के लिए भी सबसे अधिक प्रिय है। उन्होंने कहा- लंका विजय के बाद भगवान राम का माता सीता और भाइयों के साथ अयोध्या लौटने का कलात्मक चित्रण संविधान के पृष्ठों पर देखने को मिलता है। मुझे इस चित्र को देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। उन्होंने कहा…प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर मैंने प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि राम मंदिर का निर्माण और इसका साक्षी बनना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। हम लोग विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। 2040 या उससे पहले हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
राज्यपाल बोलीं…अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत की भूमि
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत की भूमि है। आज का दिन देशवासियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा। नवरात्रि के पहले दिन राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना हो रही है। इस पावन कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुकी है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। भारत ने दुनिया को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दिया है। यह भी सिखाया है कि सत्य की हमेशा जीत होती है। इसी कारण आज दुनिया बड़े से बड़े संकट के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है।
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