सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को 2 साल की जेल
बिलासपुर,18 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ‘बिलासपुर नसबंदी कांड’ में करीब 11 साल और 4 महीने के लंबे इंतजार के बाद जिला अदालत ने बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है। एडीजे कोर्ट के न्यायाधीश शैलेश कुमार ने मुख्य आरोपी सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को गैर-इरादतन हत्या (धारा 304-ए) और लापरवाही का दोषी पाते हुए 2 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला नवंबर 2014 का है,जब सकरी क्षेत्र के नेमिचंद्र जैन अस्पताल सहित पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में बड़ी संख्या में महिलाओं का ऑपरेशन किया गया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते 15 महिलाओं की मौत हो गई और 100 से अधिक महिलाओं को गंभीर हालत में सिम्स व अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था। अदालत ने इस मामले में दवा सप्लाई से जुड़े महावर फार्मा और कविता फार्मास्युटिकल्स के संचालकों सहित 5 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में रमेश महावर,सुमित महावर,राकेश खरे, राजेश खरे और मनीष खरे शामिल हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि इन आरोपियों की सामूहिक मौतों में क्या सीधी भूमिका थी। शुरुआती जांच में दवाओं में चूहे मारने वाले जहर (जिंक फास्फाइड) होने के आरोप लगे थे, लेकिन बाद में छत्तीसगढ़ स्टेट फॉरेंसिक लैब और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी की रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई। लैब की इसी ‘क्लीन चिट’ ने आरोपियों के पक्ष को मजबूत कर दिया और उन्हें संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया। नसबंदी कांड के बाद यह मामला न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था।
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