20 साल बाद फिर मिले बचपन के दोस्त, शिशु मंदिर 2006 बैच का भावुक रीयूनियन
देश–विदेश की दूरियां टूटीं, रायपुर में सजी शिशु मंदिर 2006 बैच की यादों की महफिल
स्कूल की घंटी फिर गूंजी: शिशु मंदिर मनेंद्रगढ़ 2006 बैच का यादगार मिलन
बचपन की दोस्ती की जीत: दो दशक बाद एक मंच पर मिले शिशु मंदिर के यार
20 साल बाद वही दोस्त, वही अपनापन शिशु मंदिर 2006 बैच: दोस्ती की वापसी
20 साल बाद 2006 बैच का मिलन, ढोल-ताशों और मोतियों की माला से हुआ भावुक स्वागत

-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़,12 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। स्कूल की प्रार्थना सभा की शांति, टिफिन साझा करने की मासूम खुशी और परीक्षा के दिनों की हड़बड़ी—वक्त के साथ सब पीछे छूट गया, पर दोस्ती नहीं, राजधानी रायपुर स्थित पैपीलॉन स्टे फार्म में रविवार को ऐसा ही भावुक दृश्य साकार हुआ, जब सरस्वती शिशु मंदिर, मनेंद्रगढ़ के 2006 बैच के छात्र-छात्राएं करीब दो दशक बाद फिर आमने-सामने आए। गले मिलते ही वर्षों का फासला मानो पलभर में सिमट गया, यह रीयूनियन सिर्फ मुलाकात नहीं था, बल्कि उन मूल्यों और रिश्तों की ओर लौटना था जहां से सपनों ने उड़ान भरी, समय, दूरी और सीमाएं बदल सकती हैं सच्ची दोस्ती नहीं।
सात समंदर पार से दोस्ती की उड़ान- रीयूनियन की सबसे खास बात यह रही कि दूरी दोस्ती के आगे छोटी पड़ गई, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से नेहा सिंह विशेष रूप से रायपुर पहुंचीं, भावुक होकर उन्होंने कहा, देश बदला, शहर बदले, पर जिन दोस्तों के साथ क-ख-ग-घ सीखा, उनकी जगह दिल में हमेशा रही, इसी तरह अंकिता मजूमदार और कुणाल मजूमदार बेंगलुरु से, जबकि शिप्रा तिवारी दिल्ली से इस मिलन के साक्षी बने। अलग-अलग शहरों और देशों में बस चुके ये दोस्त, दो दिनों के लिए फिर वही स्कूल के साथी बन गए।
व्हाट्सएप ग्रुप से रीयूनियन तक- इस आयोजन के पीछे महीनों की तैयारी और तकनीक का सही उपयोग रहा, मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर क्षेत्र के इस बैच के करीब 30 छात्रों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक-दूसरे से संपर्क साधा, पुरानी तस्वीरें साझा कीं और अंततः रीयूनियन की रूपरेखा तय की, आज इस समूह में डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार और उद्यमी हैं, लेकिन फार्म हाउस की दहलीज पर कदम रखते ही सभी फिर से सिर्फ विद्यार्थी बन गए।
ढोल-ताशों की गूंज, मोतियों की माला और यादों का कारवां- कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक अंदाज में हुई। ढोल-ताशों की गूंज के बीच दोस्तों का स्वागत मोतियों की माला पहनाकर किया गया, दिनभर हंसी-ठिठोली, क्लासरूम के किस्से, खेल के मैदान की यादें और शिक्षकों के अनुशासन से जुड़े अनुभव साझा होते रहे, सोमवार को दो दिवसीय आयोजन का समापन यादगार ग्रुप फोटो, विशेष मोमेंटो और उपहारों के वितरण के साथ हुआ—हर चेहरे पर तृप्ति और आंखों में नमी साफ झलकती रही।
मौजूद रहे ये साथी- साकेत गोयल, सतीश गुप्ता, पंकज जैन, रवि तल्लानी, चंद्रशेखर तिवारी, राजेश चोपड़ा, नेहा सिंह, नेहा सरकार, समीर आलम, अंकित अग्रवाल, अंकिता मजूमदार, कुणाल मजूमदार, आयुष पटेल, शिप्रा तिवारी, हर्ष अहिरवार, मनीष बरियार, प्रतीक नायक, गौरव त्रिपाठी, मनीष सिंह, सोनू सिंह, मनोज नागपुरे, राकेश पासवान, दीपक तोमर, रविकांत सिंह, दीपक साहू और राहुल तिवारी।
दोस्तों की जुबानी
मनोज नागपुरे: “20 साल बाद यारों को करीब पाना सपने जैसा है, स्कूल की यादें हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं।”
राहुल तिवारी: “दूरी चाहे जितनी हो, बचपन की दोस्ती हमें खींच ही लाती है। यह रीयूनियन हमारी जड़ों से जुड़ाव है।”
रविकांत सिंह राजपूत: “सरस्वती शिशु मंदिर के संस्कार और दोस्तों का साथ—आज जो भी हैं, उसी की देन है।”
साकेत गोयल: “व्हाट्सएप से शुरू हुआ सफर रायपुर में हकीकत बना, साथियों की सफलता देखकर गर्व होता है।”
गौरव त्रिपाठी: “कामकाजी जीवन की भागदौड़ में ये दो दिन नई ऊर्जा दे गए, दोस्ती का यह कारवां अब रुकेगा नहीं।”
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