मुंबई,08 जनवरी 2026। महाराष्ट्र के पुणे निवासी प्रख्यात वैज्ञानिक और पारिस्थिकीविद डॉ. माधव गाडगिल (82) का बीती रात पुणे स्थित डॉ. शिरीष प्रयाग हॉस्पिटल में निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से डॉ. माधव गाडगिल का इस अस्पताल में इलाज हो रहा था। यह जानकारी माधव गाडगिल के बेटे सिद्धार्थ गाडगिल ने गुरुवार को दी। पारिस्थिकीविद डॉ. गाडगिल को भारत के अग्रणी पर्यावरण चिंतकों में गिना जाता था। उन्हें ‘धरती पुत्र’ भी कहा जाता है। उन्होंने पूरी जिंदगी भारत में पर्यावरणीय, खासकर वेस्टर्न घाट की जैव विविधता के बारे में जागरूकता को जिंदा रखने की कोशिश की। माधव गाडगिल ने ही सबसे पहले प्रशासन को चेतावनी दी थी कि पश्चिमी घाट में हो रहे विकास के काम से घाट के जानवरों और पेड़-पौधों और पूरे पारिस्थिकी संतुलन के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है। पारिस्थिकीविद डॉ.गाडगिल की 2011 में तैयार की गई गाडगिल रिपोर्ट एक आईना थी, जिसने उस सोच की कड़वी सच्चाई को दिखाया जो विकास के काम के लिए पर्यावरण जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
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