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इंदौर@इंदौर दूषित पानी मामले में अब तक 15 लोगों की मौत

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सरकार ने हाई कोर्ट में पेश की स्टेटस रिपोर्ट,बताया…केवल चार मौते हुईं

इंदौर,02 जनवरी 2026। इंदौर में गंदे पानी से मौत के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश कर दी, इसमें पानी से सिर्फ 4 मौत होने की बात कही है। सरकार की रिपोर्ट की ये स्थिति तब है, जब 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। इनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। गुरुवार को महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में भी पानी में सीवेज मिलने की पुष्टि हो चुकी है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,सांसद शंकर लालवानी और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी खुद पाइपलाइन लीकेज व पानी में सीवेज मिला होने की बात कह चुके हैं। मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र के भागीरथपुरा के 16 बच्चों समेत 201 लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, इंटर विनर (हस्तक्षेप कर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में रिपोर्ट पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। अब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विरोध इंदौर के साथ ही भोपाल,जबलपुर, रतलाम और नर्मदापुरम में भी हो रहा है। वहीं,पूर्व सीएम उमा भारती ने इसे सीएम मोहन यादव के लिए परीक्षा की घड़ी बताया। इस पाप का प्रायश्चित करना होगा। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। इस अधिकार की हत्या के लिए बीजेपी का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है।
राहुल बोले…जहर बंटा
और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा…

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा…इंदौर में पानी नहीं,जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है,गरीब बेबस हैं और ऊपर से बीजेपी नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है,उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की- फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं…ये जवाबदेही की मांग है।
जिंदगी की कीमत 2 लाख
रुपये नहीं होती : उमा भारती

इंदौर में दूषित पानी से मौतों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स लिखा है कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड! उन्होंने लिखा है कि साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश,हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है,मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।

जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।

सरकार ने 4 मृतकों के नाम बताए…
राज्य सरकार ने 39 पेज की स्टेट्स रिपोर्ट में बताया कि दूषित पानी से चार सीनियर सिटीजन की मौत हुई है। सभी की उम्र 60 साल से ज्यादा है। इनमें उर्मिला की मौत 28 दिसंबर, तारा (60) और नंदा (70) की 30 दिसंबर और हीरालाल ( 65) की 31 दिसंबर को हुई।
पूर्व गृह मंत्री ने कहा- दोषियों
पर कड़ी कार्रवाई की जाए…
पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी नेता हिम्मत कोठारी ने कहा… इस मामले में जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे। दोषियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।


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