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अम्बिकापुर@परसोड़ी में खदान विस्तार के खिलाफ विरोध जारी,स्वशासन दिवस पर पेसा एक्ट का प्रचार

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,24 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। परसोड़ी कला गांव में अमेरा कोयला खदान के विस्तार के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है। 24 दिसंबर को, पेसा एक्ट पंचायती राज विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम, 1996 के लागू होने की 29वीं वर्षगांठ पर ग्रामीणों ने स्वशासन दिवस मनाया। इस अवसर पर ग्रामीण एकजुट होकर पेसा एक्ट और वन अधिकार अधिनियम जैसे कानूनों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, साथ ही खदान विस्तार का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जन संयाजक जनसाय पोया ने बताया कि पेसा एक्ट, जो 24 दिसंबर 1996 को लागू हुआ था, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को ग्राम सभा के माध्यम से स्वशासन का अधिकार प्रदान करता है। इसमें जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय नियंत्रण, खनन परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा की बात की गई है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन और खनन कंपनियां इस कानून की अनदेखी कर रही हैं। वे कहते हैं कि कोल बेयरिंग एक्ट 1957 का हवाला देते हुए अधिकारियों ने संविधान की गलत व्याख्या की है, जबकि पेसा कानून प्रमुखता रखता है। अमेरा ओपनकास्ट कोयला खदान का विस्तार हसदेव अरण्य क्षेत्र से जुड़ा है, जो जैव विविधता से भरपूर घना जंगल है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान विस्तार से उनकी जमीन, जंगल और जल स्रोत नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। वे ‘जल, जंगल, जमीन बचाओ’ के नारे के साथ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान विस्तार के लिए ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई, मुआवजा अपर्याप्त है, और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। वे संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।


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