- ईडब्ल्यूएस गरीबों के लिए…पर लाभ उठाने को अमीर? तहसील आवेदन से खुल रही व्यवस्था की कमजोरियाँ
- योजनाएँ जरूरतमंदों के लिए बनीं,पर फायदा सबसे पहले पहुँच वाले उठा ले जाएँ…क्या यही नया मॉडल?
- नगर सेठ के नाती के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की मांग…सक्षम परिवार का आवेदन बना तहसील में चर्चा का विषय
- 8 लाख से कम आय व सीमित अचल संपत्ति की शर्त…क्या झूठ बोलकर हासिल किया जा रहा है ‘गरीबी का प्रमाण-पत्र?
- बैकुंठपुर/पटना@व्यापार व राजनीति में लंबे समय से मजबूत परिवार
- फिर भी ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ का दावा
- संपन्न व्यापारी-राजनीतिक परिवार ने वार्षिक आय
- 3.50 लाख बताई, तहसील में खड़ा हुआ बड़ा सवाल।
- जाँच-पड़ताल की सख्ती कहाँ? क्या नियम प्रभाव के सामने हमेशा झुक जाते हैं?
- गरीब का हक छिनने का खतरा गहराया और ईडब्ल्यूएस की विश्वसनीयता फिर सवालों में…

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना 30 नवम्बर 2025 (दैनिक घटती-घटना)। पटना तहसील में प्रस्तुत एक आवेदन इन दिनों कोरिया जिले में गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है। आवेदन नगर के एक बेहद सक्षम, प्रभावशाली और संपन्न परिवार—जिसे लोग ‘नगर सेठ’ के नाम से जानते हैं के पुत्र द्वारा दिया गया है, उन्होंने अपने पुत्र (नगर सेठ के नाती) के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनाने की मांग की है, आवेदन में परिवार की वार्षिक आय 3 लाख 50 हजार रुपये दर्शाई गई है, जबकि जिलेभर में लोग इस परिवार को अति-संपन्न, वर्षों से व्यापारिक रूप से स्थापित और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मानते हैं। इसी वजह से तहसील में यह आवेदन अचरज भी पैदा कर रहा है और सवाल भी।
गरीबी का प्रमाणपत्र अमीरी की पहुँच
गरीबी सिर्फ एक स्थिति नहीं, बल्कि संघर्ष का वह बोझ है जिसे रोज़ ढोकर आम आदमी जीता है। लेकिन आज हालत यह है कि गरीबी की पीड़ा से दूर रहने वाले, सुविधाओं से घिरे, व्यापार और राजनीति में मजबूत परिवार भी सरकारी लाभ हासिल करने के लिए स्वयं को ‘गरीब’ घोषित करने लगे हैं। यह सिर्फ विडंबना नहीं बल्कि व्यवस्थागत नैतिक पतन का सबसे खतरनाक संकेत है, पटना तहसील में नगर सेठ के परिवार द्वारा प्रस्तुत ईडब्ल्यूएस आवेदन इस क्षेत्र की सच्चाई बेनकाब करता है। जिस परिवार का व्यापारिक व राजनीतिक वर्चस्व वर्षों से कायम है, वह यदि अपनी आय ‘3.50 लाख’ घोषित करे और गरीबी प्रमाणपत्र माँगे, तो यह सिर्फ एक आवेदन नहीं, गरीबों के अधिकार पर हमला है। यह वही वर्ग है जिसके लिए ईडब्ल्यूएस बनाया गया था, वे लोग जो सचमुच कमजोर हैं, जिन्हें सुविधाएँ नहीं मिलतीं, जिन्हें नसलों तक संघर्ष विरासत में मिलता है, पर अब उनके हिस्से पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है, प्रश्न यह नहीं कि किसी सक्षम परिवार ने आवेदन क्यों दिया, प्रश्न यह है कि वे ऐसा कर कैसे लेते हैं? क्या आय की सच्चाई को परखने की व्यवस्था इतनी कमजोर है? क्या तहसील कार्यालय प्रभावशाली नामों के आगे निरीह हो जाता है?
ईडब्ल्यूएस की शर्तें बेहद सख्त…पर आवेदन ने खड़े किए अनेक सवालः
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र उन्हीं लोगों को मिलता है जिनकी, वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से कम हो, अचल संपत्ति निर्धारित सीमा से कम हो, परिवार का आर्थिक स्तर सचमुच कमजोर हो लेकिन जब एक ऐसा परिवार, जो वर्षों से बड़े पैमाने पर व्यापार में सक्रिय रहा हो और जिले की राजनीति में शीर्ष पदों तक प्रभाव रखता हो अपने बच्चे के लिए ‘गरीब वर्ग’ का प्रमाणपत्र मांगता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या ईडब्ल्यूएस की पात्रता पूरी तरह कागज़ का खेल बन चुकी है?
समाज का सबसे बड़ा सच यही है, जिन्हें सुविधा चाहिए, वे कतार में खड़े रहते हैं, जिन्हें सुविधा नहीं चाहिए, वे नियम मोड़कर आगे निकल जाते हैं, गरीब के लिए बनाई योजनाएँ यदि अमीरों के लिए शॉर्टकट बन जाएँ, तो यह सिर्फ अन्याय नहीं, शासन व्यवस्था की असफलता है, धनवान जब गरीबी खरीद लेते हैं, तो वास्तविक गरीबों के हिस्से की सीटें, छात्रवृत्तियाँ, नौकरियाँ, अवसर सब कुछ छिन जाता है, ईडब्ल्यूएस का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को न्याय देना था, लेकिन जब संपन्न लोग भी इसे हथिया लेते हैं, तो यह नीति कमजोरों के लिए नहीं, बल्कि पहुँच वाले लोगों के लिए हथियार बन जाती है, प्रशासन, राजनीति और समाज तीनों को यह समझना होगा कि गरीबी प्रमाणपत्र बाँटना नहीं है, सुरक्षित रखना है, क्योंकि जब अमीर गरीब बन जाते हैं, तब गरीब के लिए सिर्फ एक शब्द बच जाता है अन्याय।
क्या सक्षम लोग झूठ बोलकर गरीब का हिस्सा छीन रहे हैं?
आवेदन को लेकर तहसील में चर्चा यही है कि यदि सक्षम लोग भी स्वयं को गरीब बताकर सरकारी लाभ उठाने लगेंगे, तो वास्तविक जरूरतमंदों का अधिकार कौन बचाएगा? यह खबर इसी वास्तविकता की ओर इशारा करती है कि आज सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों, नौकरियों और सेवाओं में आरक्षित अवसर पाने की होड़ में सक्षम लोग भी असक्षम होने का अभिनय करने लगे हैं।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र…गरीबों का हक, लेकिन सक्षम की पहुँच में आसानी?
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को मिलना चाहिए,ताकि उन्हें सरकारी सेवाओं में, शैक्षणिक संस्थानों में,शासकीय योजनाओं में आरक्षण और सहायता का लाभ मिल सके, लेकिन जब बड़े, संपन्न और प्रभावशाली लोग अपने बच्चों को ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ घोषित कराते हैं, यह सिर्फ नैतिक विचलन नहीं—बल्कि अधिकार छीनने का अपराध जैसा व्यवहार माना जाता है।
पूर्ण जांच के बिना ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र जारी होना बड़ा खतरा
समाज में व्याप्त असमानता को कम करने हेतु बनी योजना तभी सार्थक है जब जांच निष्पक्ष हो,संपत्ति सत्यापन सख्त हो,प्रभाव के आगे नियम न टूटें,परंतु सक्षम परिवारों द्वारा आसानी से ईडब्ल्यूएस बनवा लिए जाने की घटनाएँ यह साबित करती हैं कि जिसके पास ताकत है,वह गरीबी भी खरीद लेता है।
सवाल जो इस आवेदन ने खड़े कर दिए
– सवालः क्या संपन्न लोग झूठे आय-प्रमाण से ‘गरीब कोटे’ में जगह ले रहे हैं?
– सवालः क्या तहसील कार्यालय प्रभावशाली लोगों के आवेदन पर ढीली जांच करता है?
– सवालः क्या वास्तविक गरीबों का अधिकार बड़े परिवारों की पहुँच के कारण खतरे में है?
– सवालः क्या यह आवेदन ‘ईडब्ल्यूएस नीति’ की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न नहीं?
– सवालः क्या यह मामला बड़े पैमाने पर होने वाले ईडब्ल्यूएस दुरुपयोग का सिर्फ एक नमूना है?
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