- संवाददाता –
अंबिकापुर,15 अप्रैल 2025 (घटती-घटना)।गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत से राहत दिलाने के लिए करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी हालात में तदीली नहीं आ पाई है। सरगुजा जिले का एक गांव ऐसा है, जहां के लोग एक दिन पानी भरने के बाद तीन दिन तक रोजमर्रा के कार्यों में उपयोग लाते हैं। नहाने के लिए पानी मिलना दूभर है। घरों में जूठे बर्तनों को छोड़ देना पड़ता है। ऐसे हालातों से जूझ रहे ग्रामीण मंगलवार को कलेक्टर को अपना दुखड़ा सुनाने कलेक्टोरेट अंबिकापुर पहुंचे। इन्होंने बताया जल जीवन मिशन के तहत गांव में 3 बड़ी टंकी का निर्माण कार्य लाखों रुपये फूंककर किया गया, जो किसी काम का नहीं है। टंकी में पानी भरने के लिए बोर की खोदाई की गई, लेकिन इसे टंकी से कनेक्ट नहीं किया गया है।
ग्राम बकना कला निवासी बिरजू टेकाम,राजनाथ,राजू,रामप्यारी,विश्वनाथ, अंजली, अनिता सहित अन्य ने बताया कि गांव में लगभग 300 घर है। जिसमें 1500 से अधिक लोग निवास करते हैं। लेकिन इन्हें भीषण गर्मी में पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक से डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करके दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता हैं। गांव में बोर है लेकिन रोज इतनी बड़ी आबादी के लिए उससे पानी मिल पाना मुश्किल है। गांव का ढोढ़ी भी सूख चुका है। हैण्डपम्प से लाल पानी निकलने के कारण उसे बमुश्किल छानकर खाना बनाने और बर्तन धोने के उपयोग में लाते हैं। हैण्डपम्प से भी पूरी आबादी को पानी नहीं मिल पाता है। गर्मी के मौसम में रोज नहाने के लिए पानी उन्हें मुनासिब नहीं है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जल जीवन योजना पूरी तरह फेल है। योजना के तहत गांव में 3 बड़ी टंकियों का निर्माण तो करा दिया गया है पर उसमें एक बूंद पानी नहीं है। इसके अलावा सिंटेक्स लगाए गए हैं, जो खुद प्यासे हैं। कई घरों में नल का कनेक्शन तक नहीं पहुंच पाया है। जिनके घरों तक कनेक्शन पहुंचा, वे भी शासन की रीति-नीति को कोस रहे हंै। जल जीचन योजना हाथी का दांत साबित हो रहा है। गांव में केवल बड़ी-बड़ी टंकी दिखेंगे पर उसमें प्यास बूझाने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग 20 हैंडपंप है। जो आबादी के क्षमता के अनुसार नहीं है। अधिकांश हैंडपंप पुरानी है। जिसमें लाल दूषित पानी निकलता है जो पीने लायक नहीं है। मजबूरी में ग्राीमण छानकर पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं गांव की संख्या लगभग 1500 से अधिक होने के कारण हैंडपंप भी सूख जाता है। मजबूरी में गांव की महिलाएं दूसरे गांव में जाकर पानी लाते हैं। दूसरे के घर पानी लाने में उनहें भी शर्मिंदगी महसूस होती है। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे ग्राम बकनाकला के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की सप्लाई कराई जाए ताकि हमलोगों को भीषण गर्मी में पानी के लिए तरसना न पड़े।
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