@ सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
@ सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम पर जमानती वारंट की आलोचना की
@ अदालत ने कहा, जमानती वारंट जारी करने का कोई औचित्य नहीं
@ मामला लुधियाना, ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया
नई दिल्ली,08 जनवरी,2025 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम (डीवी एक्ट), 2005 के तहत जमानती वारंट जारी करने पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डीवी एक्ट के तहत मामलों में अदालत ने कहा कि डीवी अधिनियम के तहत मामलों में जमानती वारंट जारी करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि ये अर्ध-आपराधिक प्रकृति के होते हैं। अदालत ने कहा कि जब तक प्रोटेक्शन आदेश का उल्लंघन न हो तब तक इनके कारण कोई दंडात्मक प्रभाव नहीं पड़ता ऐसे में जमानती वारंट जारी करने का कोई औचित्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के लिए बनाए गए डीवी एक्ट के तहत मामले
में मजिस्ट्रेट द्वारा जमानती वारंट जारी करने की आलोचना की। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बात को कहने के लिए विवश है कि डीवी अधिनियम के प्रावधानों के तहत दायर एक आवेदन में ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानती वारंट जारी करने का कोई औचित्य नहीं था। ऐसे में मजिस्ट्रेट द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ जमानती वारंट जारी करना पूरी तरह से अनुचित था।
सुनवाई के दौरान याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास एक विशेष रूप से सक्षम (सुनने की क्षमता में बाधित) नाबालिग पुत्र है। वह बेरोजगार है और अपनी जीविका के लिए पूरी तरह अपने पिता पर निर्भर है। यह भी बताया गया कि निचली अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी जमानती वारंट को अनुचित ठहराया।
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