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कविता@ गोवर्धन पूजा

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जय जय जय गिरिराज आए हम शरण तिहारी,
जय हो महाराज तुमसा ना कोई और हितकारी,
रक्षा हेतु नख पर गोवर्धन उठाया हे गोवर्धन धारी,
तुमसा ना कोई और दयालु जाऊं तुम पर बलिहारी ।
कन्हैया, कृष्ण, यशोदा नंदन, हे राधा रमण बिहारी,
भक्तों की कामना पूरी करते माधव मुकुंद मुरारी,
इंद्र का मान भंग किया हे लीलाधर पीताम्बरधारी,
कमलनयन रसिक मनोहर वासुदेव हरि बंशीधारी ।
पुकार सुन द्वापर युग में प्रगटे जग पालन हारी,
गौ सेवक, रक्षक, पालक, गोविंद आनंद कारी,
माखन मिश्री भावे नंदनंदन कानुडा¸ जय गिरधारी,
श्रीजी चरण रज , मैं शीश सजाऊं दासी तुम्हारी ।
वैजन्ती माला कंठ हार, मुक्तामणि कौस्तुभ धारी,
तुमने दुष्टों को मारा, भक्तों को तारा सुदर्शन धारी,
नाग नथईया वंशी बजईया सर्वांग सुंदर कामणगारि,
भक्तों के कष्ट हरते श्याम सुंदर प्रभु कल्याणकारी ।
मधुर मधुर अष्टाक्षर मंत्र श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
जपे जो श्रद्धा भक्ति भाव से हो जीवन फिर सुखकारी,
सात कोस गोवर्धन परिक्रमा करूं गाऊं गीत तुम्हारी,
नाथ तुम सुखों की छईया जीवन प्राण मेरे हे त्रिपुरारी ।
मोनिका डागा आनंद
चेन्नई,तमिलनाडु


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