अंबिकापुर, 12 सितम्बर 2024 (घटती-घटना)। डीजे की तीव्र ध्वनि से ब्रेन हेमरेज की संभावना बताई जा रही है। संजय जायसवाल (40) बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सनावल का रहने वाला है। दो दिन पूर्व चक्कर आने व उल्टी की शिकायत पर परिजन उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। यहां ईएनटी विभाग के चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने जब उसका सीटी स्कैन कराया और रिपोर्ट देखी तो युवक के सिर के पीछे हिस्से का नस फटने से लड क्लॉटिंग हुई थी। चिकित्सक ने बताया कि सामान्यतः ऐसा हाई लड प्रेशर, एक्सीडेंट व मारपीट की घटना में होता है, जबकि युवक के परिजन द्वारा उसके साथ ऐसी कोई घटना न होने की बात बताई गई।
डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि दो माह में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 500 मरीजों का सुनाई देने की क्षमता की जांच की गई, जिसमें 161 मरीजों में सुनाई देने वाली नसों के प्रभावित होने की बात जांच में सामने आई है। वर्तमान में ध्वनि प्रदूषण के कारण बधिरता में 15 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है। समान्य तौर पर 70 डेसीबल की तीव्रता की ध्वनि मानव शरीर के लिये उपयुक्त रहती है। 85 डेसीबल की ध्वनि तीव्रता लगातार कान में पडऩे से सुनने की क्षमता में स्थायी रूप से कमी कर सकती है। सुनने की क्षमता के साथ स्वभाव में चिड़चिड़ापन,उच्च रक्तचाप, हृदय घात, लकवा, अनिद्रा, भूलने की बीमारी व एलजाइमर्स बीमारी होने की संभावना हो सकती है।
रोकथाम के लिए डॉक्टर ने सौंपा ज्ञापन
राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने ध्वनि प्रदूषण से होने वाले खतरों से बचाव के लिए कलेक्टर एवं पुलिस को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि ध्वनि विस्तारक यंत्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण से आमजन का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
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