अंबिकापुर,14 अपै्रल 2024 (घटती-घटना)। लोक आस्था और सूर्य उपासना के पर्व चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया। शहर के शंकर घाट, घुटनघुट्टा सहित पूरे जिले में विभिन्न जलाशयों के किनारे श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और पूजा-अर्चना की। चार दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान के अंतिम दिन सोमवार को व्रती सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे।
चैती छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल षष्ठी यानी रविवार की संध्या पहर में अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की पूजा संपन्न हो गई। शहर सहित जिले के विभिन्न छठ घाटों पर श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य देते नजर आए। व्रती महिला -पुरुष ने स्नान -ध्यान कर पीला व लाल वस्त्र धारण कर पूरी पवित्रता के साथ हाथों में बांस की सूप में फल ठेकुआ, ईख, नारियल रखकर डूबते हुए सूर्य अर्घ्य दान किया। शहर के शंकर घाट व घुनघुट्टा जलाशय छठ घाट पर व्रतियों की काफी भीड़ देखी गई। शाम 4 बजते ही व्रति अपने-अपने घरों से पूरी तैयारी के साथ छट गीत कंचही बांस के बहंगी, बहंगी चलकत जाय जैसे गीतों के साथ भगवान भास्कर को अराधना करते हुए छट घाट पहुंचे और जलाशय में स्नान कर सूर्य डूबने से पहले उन्हें अर्घ्य अर्पित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की।
उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा समापन
छत व्रत चार दिनों का होता है। पहले दिन शुक्रवार को नहान खान के साथ व्रत शुरू हुआ था। दूसरे दिन शनिवार को खरना के साथ व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा है और रविवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं का व्रत संपन्न हो जाएगा। इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण कर पारण करेंगे।
दंडवत करते
पहुंचे छठ घाट
चैती छठ का विशेष महत्व है। अधिकांश लोग मन्नत पूरी करने के लिए यह व्रत करते हैं। कई व्रती अपने घरों से दंडवत देते हुए छठ घाटों तक पहुंचे। इस दौरान व्रतियों के आगे-आगे सिर पर दउरा लेकर खाली पैर लोग चल रहे थे।
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