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खड़गवां@अस्पताल का निर्माण,लेकिन मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल! खड़गवां में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था कठघरे में,हेलमेट,सेफ्टी बेल्ट और अन्य उपकरणों की उपलब्धता की जांच जरूरी,श्रम विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,02 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
क्षेत्र में निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, आरोप है कि खड़गवां क्षेत्र में कई निर्माण स्थलों पर ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों की सुरक्षा के निर्धारित मानकों की अनदेखी कर काम कराया जा रहा है। इसका एक उदाहरण खड़गवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्य में देखने को मिल रहा है, जहां मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, निर्माण कार्य की प्रगति के बीच यह जानना जरूरी हैकि वहां काम करने वाले श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं, सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण स्थल पर मजदूरों को हेलमेट, सुरक्षा जूते, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट और अन्य जरूरी उपकरण दिए जा रहे हैं या नहीं? विशेषकर ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना आवश्यक है, यदि बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों से काम कराया जा रहा है तो यह उनकी जान को जोखिम में डालने वाली गंभीर लापरवाही है।
भवन निर्माण की जिम्मेदारी के साथ मजदूरों की सुरक्षा भी जरूरी
किसी भी निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की जिम्मेदारी केवल तय समय में भवन तैयार करना नहीं होती, बल्कि निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है, निर्माण स्थल पर ऊंचाई से गिरने, भारी सामग्री की चपेट में आने और विद्युत उपकरणों से दुर्घटना होने जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं, ऐसे में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनका उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है, विडंबना यह है कि जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए किया जा रहा है, उसी के निर्माण में लगे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, आखिर निर्माण की गति और समयसीमा के बीच मजदूरों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है?
श्रम विभाग की निगरानीआखिर कहां है?-
इस मामले में श्रम विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर खड़गवां क्षेत्र में संचालित निर्माण कार्यों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है या नहीं? क्या श्रम विभाग के अधिकारियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की जांच की है? यदि निरीक्षण हुआ है तो कमियां मिलने पर क्या कार्रवाई की गई? श्रम विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्षेत्र के अन्य निर्माणाधीन भवनों में श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं,केवल किसी दुर्घटना के बाद जांच और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने के बजाय दुर्घटना रोकने के लिए पहले से प्रभावी निगरानी जरूरी है।
हादसे का इंतजार या समय रहते कार्रवाई?
मजदूर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए निर्माण स्थलों पर मेहनत करते हैं, उनकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों के बिना काम कराना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है, यदि किसी निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है तो संबंधित ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए, अब मांग उठ रही है कि श्रम विभाग खड़गवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित क्षेत्र के सभी निर्माणाधीन भवनों का औचक निरीक्षण करे, मजदूरों को उपलब्ध कराए जा रहे सुरक्षा उपकरणों, ऊंचाई पर काम करने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुरक्षा उपायों की जांच की जाए,नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, सवाल सीधा है—क्या श्रम विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा या समय रहते निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराएगा? अस्पताल की इमारत बनाने वाले मजदूरों की जान भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी उस भवन में भविष्य में उपचार कराने आने वाले मरीजों की,विकास के नाम पर श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।


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