तेज रफ्तार ट्रकों पर लगाम कब? हादसे के बाद अज्ञात वाहन चालक फरार, सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

-संवाददाता-
दतिमा,10 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार दोपहर सूरजपुर जिले के लटोरी चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगापुर में हुए दर्दनाक हादसे में भाजपा लटोरी मंडल उपाध्यक्ष 45 वर्षीय नरेश चौधरी पिता मनबोध चौधरी की मौत ने एक बार फिर इस मार्ग की यातायात और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन समेत फरार हो गया, जबकि पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर वाहन की तलाश कर रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत तुलसी निवासी नरेश चौधरी बुधवार को किसी कार्य से लटोरी आए थे। दोपहर करीब 3 बजे बाइक से वापस तुलसी लौटते समय गंगापुर में ज्वाला घर के समीप पीछे से तेज गति से आ रहे अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद नरेश सड़क पर जा गिरे और ट्रक उन्हें कुचलते हुए निकल गया। गंभीर रूप से कुचल जाने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। लटोरी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा तथा घटना की जांच शुरू की। अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
हादसा हुआ,चालक भाग गया… निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इस हादसे का सबसे गंभीर पहलू यह है कि भारी वाहन की टक्कर से एक व्यक्ति की मौके पर मौत हो गई,लेकिन आरोपी चालक वाहन समेत फरार होने में सफल रहा। पुलिस अब आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालकर ट्रक की पहचान करने की कोशिश कर रही है। सवाल यह है कि अंबिकापुर-बनारस जैसे व्यस्त मार्ग पर भारी वाहनों की गति और आवाजाही की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है? यदि मार्ग पर पर्याप्त निगरानी व्यवस्था है तो दुर्घटना के बाद ट्रक चालक इतनी आसानी से फरार कैसे हो गया? और यदि निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है तो दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब गंभीर होंगे?
सिर्फ एफआईआर से खत्म
नहीं होनी चाहिए जिम्मेदारी
सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस द्वारा अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ अपराध दर्ज कर तलाश करना आवश्यक कार्रवाई है,लेकिन जनहित का सवाल इससे आगे का है। लगातार हादसों वाले मार्गों पर स्पीड मॉनिटरिंग,भारी वाहनों की जांच,सीसीटीवी निगरानी,ब्लैक स्पॉट की पहचान,सड़क किनारे सुरक्षा संकेतक और प्रभावी पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा भी जरूरी है। किसी दुर्घटना के बाद शव का पोस्टमार्टम, एफआईआर और आरोपी की तलाश कर देना तत्काल कानूनी प्रक्रिया हो सकती है,लेकिन इससे सड़क हादसों की मूल समस्या समाप्त नहीं होती। यदि किसी मार्ग पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित विभागों को यह भी देखना होगा कि आखिर उन हादसों के पीछे सड़क की स्थिति,वाहन की गति, यातायात नियंत्रण अथवा निगरानी व्यवस्था में कौन-सी कमी है।
एक मौत ने फिर पूछ दिया बड़ा सवाल : नरेश चौधरी की मौत से उनके परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है। भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में भी शोक है। लेकिन यह घटना केवल एक परिवार या राजनीतिक दल का निजी दुःख नहीं है। सड़क पर चलने वाला हर व्यक्ति ऐसी दुर्घटना का संभावित शिकार हो सकता है। इसलिए प्रशासन और संबंधित विभागों से यह अपेक्षा है कि इस हादसे को केवल एक और सड़क दुर्घटना मानकर फाइल बंद न की जाए। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान,तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई और भारी वाहनों की निगरानी की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आखिर सड़क पर किसी की जान जाने के बाद ही व्यवस्था जागेगी,या हादसे से पहले भी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur