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सूरजपुर@ विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिया मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश,टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 की दी जानकारी
-संवाददाता-
सूरजपुर,10 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम,जिला सूरजपुर के अंतर्गत जिला चिकित्सालय सूरजपुर के सभाकक्ष में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया,कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने,मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के.डी. पैकरा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है,उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानकर संवेदनशील सहयोग और उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए तो गंभीर परिस्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है, उन्होंने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर बिना झिझक खुलकर बात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की।
मानसिक परेशानी को नजरअंदाज न करने की सलाह-मनोचिकित्सक डॉ. अंकित शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम से जुड़े चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी की समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है,उन्होंने बताया कि लगातार तनाव, चिंता,अवसाद,निराशा, नींद में बदलाव तथा व्यवहार में अचानक परिवर्तन जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, यदि ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में आत्महत्या से संबंधित विचार दिखाई दें तो उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए,ऐसे समय में परिवार और समाज को संवेदनशीलता एवं सहानुभूति के साथ व्यक्ति का सहयोग करते हुए तत्काल विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए,उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को छिपाने के बजाय समय पर उपचार एवं परामर्श लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
व्यवहार में बदलाव को गंभीरता से लेने की जरूरत-कार्यक्रम के दौरान नोडल अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. राजेश पैकरा ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला,उन्होंने कहा कि आत्महत्या के पीछे विभिन्न मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियां हो सकती हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के व्यवहार में होने वाले बदलावों को गंभीरता से समझना जरूरी है, उन्होंने बताया कि अत्यधिक निराशा, सामाजिक दूरी बनाना, स्वयं को दूसरों पर बोझ समझना अथवा मृत्यु एवं आत्महत्या से संबंधित बातें करना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, समय पर ऐसे संकेतों की पहचान, उचित सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव आत्महत्या रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिया संदेश-जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, इसमें वी.एम. नर्सिंग कॉलेज एवं आईआरआरसी नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की, विद्यार्थियों ने अपने पोस्टरों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य,आत्महत्या रोकथाम,तनाव प्रबंधन,सकारात्मक सोच, पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग और समय पर सहायता लेने जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया,पोस्टरों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर चुप रहने के बजाय परिवार और समाज के लोगों से संवाद करना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
14416 टेली-मानस हेल्पलाइन की दी जानकारी
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 की जानकारी भी दी गई, लोगों को बताया गया कि तनाव, चिंता, अवसाद, भावनात्मक परेशानी अथवा आत्महत्या से संबंधित विचार जैसी परिस्थितियों में समस्या को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय पर सहायता लेना आवश्यक है, इसके साथ ही जिला चिकित्सालय सूरजपुर स्थित स्पर्श क्लिनिक,ओपीडी क्रमांक 60 में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी दी गई,जरूरतमंद लोगों को वहां परामर्श, उपचार एवं आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
सामूहिक प्रयास से ही संभव है रोकथाम
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में मौजूद झिझक और भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है,किसी व्यक्ति के मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी को कमजोरी समझने के बजाय उसे समझना और आवश्यक सहयोग देना आत्महत्या रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है,उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य,मित्र,शिक्षक,सहकर्मी और समाज के अन्य लोग यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में गंभीर बदलाव को समय रहते पहचानें और उसे उचित सहायता से जोड़ें तो कठिन परिस्थितियों में उसे सहारा मिल सकता है,कार्यक्रम में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजय मरकाम,जिला कार्यक्रम प्रबंधक,मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी,नर्सिंग सिस्टर तथा जिला चिकित्सालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


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