

8-10 दिन बाद भी काम शुरू नहीं,83 पंचायतों के हजारों लोग प्रभावित 350-400 स्कूली बच्चे रोजाना 500 मीटर पैदल चलकर बदल रहे बस
-राजन पाण्डेय-
एमसीबी,29 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाले जनकपुर-शहडोल मुख्य मार्ग पर गोहड़ारी नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद क्षेत्रवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है,20 अगस्त को बारिश के दौरान पुल को नुकसान पहुंचने के बाद करीब 8-10 दिन बीत चुके हैं,लेकिन अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है, आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों,स्कूली बच्चों, व्यापारियों और मरीजों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पुल की मरम्मत में देरी से उठे विभागीय व्यवस्था पर सवाल– पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद उसकी सुरक्षा और मरम्मत को लेकर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं,मानसून के दौरान नदी-पुलों की स्थिति को देखते हुए समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव कितना प्रभावी ढंग से किया जाता है,यह भी जांच का विषय बन गया है, क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पुल की स्थिति का समय रहते निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया गया होता तो नुकसान को कम किया जा सकता था,अब पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत के लिए बजट, प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है,जबकि आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
90 फीसदी कारोबार शहडोल से जुड़ा, व्यापार पर पड़ा सीधा असर- गोहड़ारी पुल बंद होने का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय व्यापार भी इसकी चपेट में आ गया है, चांगभखार क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत कारोबार मध्य प्रदेश के शहडोल और आसपास के बाजारों से जुड़ा बताया जाता है, ऐसे में यह पुल दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है,भारी वाहनों के आवागमन पर रोक के कारण मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे जरूरी सामान की आपूर्ति और व्यापारियों के माल की आवाजाही पर असर पड़ रहा है। त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है।
इलाज के लिए मध्य प्रदेश पर निर्भर आबादी की बढ़ी मुश्किल– क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पुल बंद होने का असर पड़ा है, स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र की करीब 85-90 प्रतिशत आबादी उपचार के लिए शहडोल, रीवा,जबलपुर और कटनी जैसे मध्य प्रदेश के शहरों पर निर्भर बताई जाती है, ऐसे में पुल बंद होने और वैकल्पिक मार्ग से लंबी दूरी तय करने की स्थिति में गंभीर मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। आपात स्थिति में अतिरिक्त दूरी और समय किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन को घेरा- ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकुर प्रताप सिंह ने पुल की मरम्मत में हो रही देरी को प्रशासनिक नाकामी बताया,उनका कहना है कि एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है,त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का संपर्क प्रभावित है। उन्होंने कहा कि यदि दोबारा तेज बारिश हुई तो क्षतिग्रस्त ढांचा और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने बताई जमीनी स्थिति- नगर पंचायत उपाध्यक्ष नीलेश मिश्रा के अनुसार तेज बाढ़ के दौरान पुल का बैरिकेड टूट गया और पुल के पाए को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह से चर्चा की गई है, वहीं पी डब्लू डी के स्ष्ठह्र ने जलस्तर कम होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू किए जाने की बात कही है।
पीडब्लूडीः रिपोर्ट और एस्टीमेट भेजा, स्वीकृति का इंतजार- पीडब्लूडी एसडीओ राम प्रसाद चौधरी ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुल की रिपोर्ट और एस्टीमेट उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है, बजट की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
20 की जगह 47 किलोमीटर का सफर,27 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी– पुल बंद होने के बाद प्रशासन ने वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है,जनकपुर से बहरासी, कुवांरपुर होते हुए चांटी बैरियर तक जाने वाले इस मार्ग से यात्रियों और वाहन चालकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है,पहले जनकपुर से चांटी बैरियर की दूरी करीब 20 किलोमीटर थी, जबकि वैकल्पिक मार्ग से यह दूरी लगभग 47 किलोमीटर हो गई है,यानी एक तरफ की यात्रा में करीब 27 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। इससे ईंधन खर्च बढ़ने के साथ समय की भी भारी बर्बादी हो रही है।
350-400 बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित– पुल पर आवागमन बाधित होने का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है,प्रतिदिन करीब 350 से 400 स्कूली बच्चे इस मार्ग से आवागमन करते हैं, बसें पुल के दोनों ओर आगे नहीं जा पा रही हैं, ऐसे में बच्चों और अन्य यात्रियों को एक तरफ बस से उतरकर करीब 500 मीटर पैदल चलना पड़ता है और दूसरी ओर पहुंचकर दूसरी बस पकड़नी पड़ती है,बारिश के मौसम में यह व्यवस्था बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रही है।
एक नजर में स्थिति
प्रभावित ग्राम पंचायतेंः 83
प्रभावित आश्रित गांवः 181
प्रभावित आबादीः 88,750
पुल के दूसरी ओर प्रभावित पंचायतेंः 8
इन पंचायतों की आबादीः 8,116
स्कूली बच्चेः करीब 350-400 प्रतिदिन
पैदल अतिरिक्त दूरीः करीब 500 मीटर
पुराना मार्गः करीब 20 किमी
वैकल्पिक मार्गः करीब 47 किमी
अतिरिक्त दूरीः करीब 27 किमी
स्वास्थ्य के लिए मध्य प्रदेश पर निर्भरताः करीब 85-90 प्रतिशत आबादी
भारी वाहनों पर प्रतिबंधः 20 सितंबर 2026 तक
उल्लंघन पर प्रस्तावित जुर्मानाः 2,500 से 12,500
सवाल अब सिर्फ मरम्मत का नहीं…-गोहड़ारी नदी का पुल फिलहाल केवल एक क्षतिग्रस्त संरचना नहीं, बल्कि 83 ग्राम पंचायतों, हजारों ग्रामीणों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और मरीजों के आवागमन से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है, ऐसे में सवाल यह है कि मरम्मत की स्वीकृति की प्रक्रिया कब पूरी होगी और वास्तविक काम कब शुरू होगा। बारिश के बीच हर गुजरता दिन स्थानीय लोगों की परेशानी और बढ़ा रहा है।
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