निर्माण की धीमी रफ्तार से सड़क बनी मुसीबत…बस कंडक्टर की कथित दबंगई से विवाद,एंबुलेंस तक को रास्ता देने में परेशानी

-संवाददाता-
बलरामपुर,26 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। अंबिकापुर से बलरामपुर-रामानुजगंज को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-343 इन दिनों निर्माण और बदहाल सड़क व्यवस्था के बीच फंसा नजर आ रहा है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे,नाली जैसे कटाव,निर्माण सामग्री और अधूरे हिस्सों के कारण वाहन चालकों को रोज जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि कई स्थानों पर बड़े वाहन सड़क की खराब स्थिति से बचने के लिए रॉन्ग साइड में जाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे सामने से आने वाले छोटे वाहनों, बाइक और साइकिल सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
निर्माण चल रहा है तो रखरखाव कौन करेगा? : स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। कई स्थानों पर पुरानी सड़क को खोदने या काटने के बाद लंबे समय तक उसे व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है। इससे बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। लोगों का सवाल है कि जब तक नई सड़क पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक आवागमन योग्य सड़क बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
निर्माणाधीन मार्ग पर पर्याप्त संकेतक, बैरिकेडिंग,डायवर्जन और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण करें तो कई छोटी समस्याओं को बड़े हादसे में बदलने से रोका जा सकता है।
गड्ढों से बचने रॉन्ग साइड,फिर शुरू होता है ‘साइड’ का विवाद : सड़क की खराब स्थिति का सबसे खतरनाक असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। जहां सड़क का एक हिस्सा गड्ढों या निर्माण कार्य के कारण बाधित है, वहां बस और भारी वाहन चालक दूसरी लेन में चले जाते हैं। सामने से आने वाले छोटे वाहन चालकों के लिए अचानक रास्ता बदलना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार,25 अगस्त को चंद्रगढ़ चौक के पास निर्माणाधीन पुलिया के समीप ऐसा ही एक विवाद सामने आया। आरोप है कि अंबिकापुर से रामानुजगंज की ओर जा रही ‘आदिशक्ति’ बस रॉन्ग साइड से आ रही थी और बाइक चालक से साइड को लेकर विवाद हो गया। बाइक चालक ने आरोप लगाया कि बस के कंडक्टर ने कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए बस चढ़ा देने की धमकी दी। हालांकि इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित पक्ष का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है।
एम्बुलेंस को रास्ता देना भी चुनौती : सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब इसी मार्ग से एम्बुलेंस या अन्य आपातकालीन वाहन गुजरते हैं। सड़क संकरी होने, निर्माण सामग्री और गड्ढों के कारण कई जगह वाहनों को एक-दूसरे को रास्ता देने में परेशानी होती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सामान्य वाहन कुछ देर रुककर निकल भी जाएं, लेकिन आपातकालीन वाहन के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सड़क निर्माण की अव्यवस्था किसी मरीज के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
‘पेटी कॉन्ट्रैक्ट’ पर उठे सवाल, विभागीय निगरानी पर भी नजर : स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मुख्य निर्माण एजेंसी द्वारा काम छोटे ठेकेदारों को सौंपे जाने के कारण कार्य की गुणवत्ता और गति प्रभावित हो रही है। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी नहीं होने से निर्माण एजेंसी मनमाने ढंग से काम कर रही है। कुछ लोगों ने कथित कमीशनखोरी तक के आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की स्थिति में विभागीय जांच के माध्यम से तथ्य सामने आना जरूरी है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं, ग्रामीणों ने दी चक्काजाम की चेतावनी : स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति को लेकर मौखिक और लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं,लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क के गड्ढों की तत्काल मरम्मत, सुरक्षित डायवर्जन, पर्याप्त संकेतक और निर्माण कार्य को तेज करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो चक्काजाम और आंदोलन किया जा सकता है।
एसडीएम से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब : मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए राजपुर एसडीएम देवेंद्र प्रधान से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। प्रशासन या संबंधित निर्माण एजेंसी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सवाल सीधा है—सड़क बनेगी कब और तब तक सुरक्षित सफर कौन सुनिश्चित करेगा? एनएच-343 पर निर्माण कार्य जरूरी है, लेकिन निर्माण के नाम पर यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। सड़क कब पूरी होगी, यह तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय है; लेकिन तब तक राहगीरों को सुरक्षित रास्ता देना संबंधित एजेंसी और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
एक तरफ विकास के नाम पर सड़क निर्माण चल रहा है, दूसरी तरफ उसी सड़क पर चलना लोगों के लिए जोखिम बनता जा रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ सड़क की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि उसकी निगरानी और जवाबदेही का भी है।
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