रायपुर,21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया है। एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और छात्रों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में वायरल हो गया। मामले की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया। वहीं दोषियों की पहचान और पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार गुरुवार 20 अगस्त को सुबह 10 बजे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के छात्रों की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा आयोजित की जानी थी। परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले सुबह 9 बजे प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आई। छात्रों के बीच वायरल हुए प्रश्नपत्र को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत मिली। बताया गया कि डीन कार्यालय को सुबह करीब 9 बजे ईमेल के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना दी गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने वायरल प्रश्नपत्र की जांच कराई। जांच में पाया गया कि वायरल प्रश्नपत्र और वास्तविक परीक्षा पत्र के करीब 70 प्रतिशत प्रश्न आपस में मिलते-जुलते थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा को निरस्त करने का फैसला लिया। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों ने राहत की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। छात्रों का कहना था कि पेपर लीक जैसी घटना से मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने भी तत्काल संज्ञान लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 के अनुचित साधनों के निवारण से संबंधित धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (ख्हृस्) 2023 की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र कहां से लीक हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति प्रश्नपत्र तैयार करने, छपाई, वितरण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि निरस्त की गई परीक्षा की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। विद्यार्थियों को समय पर इसकी जानकारी दी जाएगी ताकि उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। गौरतलब है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्रों की सेटिंग और छपाई विश्वविद्यालय स्तर पर ही की जाती है। इसके बाद प्रश्नपत्र संबंधित महाविद्यालयों को भेजे जाते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना को लेकर सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
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