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नई दिल्ली@टेलीग्राम पर केंद्र सख्त : पायरेटेड फिल्में हटाने का आदेश,15 दिन में मांगी रिपोर्ट,सरकार ने रखी शर्तें ?

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नई दिल्ली,04 जुलाई 2026। केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उसे पायरेटेड फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य ऑडियो-वीडियो सामग्री के प्रसार पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) सौंपने को कहा है। सरकार ने साफ किया है कि केवल शिकायत मिलने पर सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्लेटफॉर्म को खुद भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।
सरकार ने टेलीग्राम को दिए निर्देश
– पायरेटेड फिल्में और ओटीटी कंटेंट पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई करें।
– 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट यानी एटीआर सरकार को सौंपें।
– सिर्फ एक-एक चैनल हटाने की नीति अब पर्याप्त नहीं होगी।
– पायरेसी रोकने के लिए व्यापक और सक्रिय व्यवस्था विकसित करें।
– कॉपीराइट उल्लंघन रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करें।
– आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत आवश्यक सतर्कता का पालन करें।
सरकार ने कॉपीराइट कानून को लेकर क्या कहा? सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन केवल एक सामान्य कानूनी विवाद नहीं, बल्कि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत आपराधिक अपराध भी हो सकता है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में टेलीग्राम की जिम्मेदारी है कि वह उचित सतर्कता बरते और अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए।
टेलीग्राम से और क्या जानकारी मांगी गई? मंत्रालय ने टेलीग्राम से उसके शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी भी मांगी है। सरकार जानना चाहती है कि निर्माता, ओटीटी प्लेटफॉर्म, प्रसारण कंपनियां और कानून प्रवर्तन एजेंसियां पायरेटेड सामग्री की शिकायत कैसे दर्ज करा सकती हैं और उन शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई की जाती है। सरकार का मानना है कि प्लेटफॉर्म के पास प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों को समय रहते रोका जा सके।
टेलीग्राम ने कार्रवाई नहीं की तो क्या हो सकता है? सरकार ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि टेलीग्राम पर पायरेटेड सामग्री उपलब्ध रहती है, कार्रवाई अधूरी रहती है या जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की जांच और कार्रवाई की जा सकती है।


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