विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित,निलंबन से बहाली के साथ अब सहायक ग्रेड-3,मैनपाट तहसील कार्यालय में मिली पदस्थापना
संवाददाता-
अम्बिकापुर,24 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। शहर की बेशकीमती शासकीय नजूल भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाने से जुड़े चर्चित प्रकरण में जिला कार्यालय की नजूल शाखा के तत्कालीन सहायक ग्रेड-2 अजय कुमार तिवारी पर विभागीय कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद उन्हें मुख्य शास्ति के तहत सहायक ग्रेड-2 से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदावनत कर दिया गया है। साथ ही उन्हें निलंबन से बहाल करते हुए तहसील कार्यालय मैनपाट में पदस्थ किया गया है। कार्रवाई को महज स्थानांतरण या निलंबन की समाप्ति के रूप में नहीं देखा जा सकता,क्योंकि आदेश में विभागीय जांच के बाद उनके विरुद्ध आरोप प्रमाणित होने का उल्लेख है। खास बात यह है कि पदावनति के साथ उनके वेतनमान में भी कमी की गई है।
करोड़ों की सरकारी जमीन से जुड़ा था मामला
अजय तिवारी के खिलाफ कार्रवाई उस पूरे नजूल भूमि प्रकरण से जुड़ी है,जिसमें अंबिकापुर के नमनाकला स्थित खसरा नंबर 243/1 की करीब 1.710 हेक्टेयर यानी लगभग 4.22 एकड़ शासकीय नजूल भूमि को निजी व्यक्ति बंसु पिता भुटकुल के नाम दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था। पूर्व में हुई जांच में आरोप सामने आया था कि शासकीय भूमि के नामांतरण में राजस्व नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बाद में इस भूमि को निजी मद में दर्ज किए जाने और उसके बाद बिक्री किए जाने का मामला पुलिस जांच तक पहुंचा। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी अजय कुमार तिवारी के विरुद्ध लगाए गए विभागीय आरोपों में इसी नामांतरण प्रक्रिया का उल्लेख है। उल्लेखनीय है कि इसी मामले में तत्कालीन नजूल अधिकारी,नजूल शाखा के रीडर अजय तिवारी और राजस्व निरीक्षकों सहित अन्य लोगों के खिलाफ 11 मार्च 2024 को गांधीनगर थाने में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
सवाल सिर्फ एक कर्मचारी पर नहीं,पूरी प्रक्रिया पर…
इस प्रकरण की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि मामला किसी सामान्य निजी भूमि विवाद का नहीं,बल्कि शासकीय नजूल भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़ा था। सवाल यह है कि जिस जमीन का रिकॉर्ड सरकारी था,वह निजी व्यक्ति के नाम तक पहुंची कैसे? विभागीय जांच में अजय तिवारी की भूमिका को लेकर आरोप प्रमाणित होना राजस्व रिकॉर्ड की उस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है,जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेजों की जांच,नस्ती तैयार करने और नामांतरण आदेश तक कई स्तर शामिल होते हैं। अंबिकापुर के नमनाकला मामले में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार,जांच में तत्कालीन नजूल अधिकारी नीलम टोप्पो,नजूल लिपिक अजय तिवारी तथा राजस्व निरीक्षकों की भूमिका का उल्लेख किया गया था। पुलिस ने इसी आधार पर मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई थी। जिस आदेश पर जमीन निजी नाम हुई, उसे बाद में निरस्त करना पड़ा मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विवादित 1.710 हेक्टेयर भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करने वाला 7 अक्टूबर 2022 का आदेश बाद में निरस्त कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 28 मार्च 2024 को भूमि को फिर से शासकीय नजूल मद में दर्ज करने का आदेश हुआ और उसे स्वास्थ्य विभाग,महिला एवं बाल विकास विभाग,न्यायालय, पुलिस विभाग तथा नगर निगम जैसे सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए। यानी जिस जमीन को रिकॉर्ड में निजी नाम तक पहुंचा दिया गया था, प्रशासनिक कार्रवाई के बाद वही जमीन फिर सरकारी रिकॉर्ड में वापस आई। यही तथ्य इस पूरे मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
विभागीय जांच में नहीं माना गया जवाब
अजय तिवारी को निलंबन के बाद आरोप पत्र जारी कर जवाब देने का अवसर दिया गया था। निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 14 के तहत नियमित विभागीय जांच शुरू की गई। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को प्रमाणित माना। इसके बाद अजय तिवारी द्वारा जांच प्रतिवेदन पर प्रस्तुत जवाब को भी विभाग ने संतोषजनक नहीं माना। विभाग ने उनके कृत्य को कर्तव्य में लापरवाही,स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना। मीडिया में प्रकाशित विभागीय कार्रवाई संबंधी विवरण में भी उनके विरुद्ध आरोपों के प्रमाणित होने और अनधिकृत अनुपस्थिति को कार्रवाई का आधार बताया गया है।
वेतन में भी बड़ी कटौती
पदावनति के साथ अजय तिवारी के वेतनमान में भी कमी की गई है। सहायक ग्रेड-2 के रूप में उनका वेतनमान 5200-20200,ग्रेड पे2400,मैट्रिक्स लेवल-6/10 था, जिसे पदावनति के बाद 5200-20200, ग्रेड पे 1900,मैट्रिक्स लेवल-4/01 निर्धारित किया गया है। निलंबन से बहाली के बाद उन्हें तहसील कार्यालय मैनपाट,जिला सरगुजा में पदस्थ किया गया है। निलंबन अवधि को केवल सेवानिवृत्ति हितलाभ अथवा स्वत्वों के लिए सेवा अवधि माना गया है और उस दौरान प्राप्त वेतन को जीवन निर्वाह भत्ते तक सीमित किया गया है।
ड्यूटी से गैरहाजिरी भी बनी कार्रवाई का आधार
नजूल प्रकरण के बीच अजय तिवारी को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धौरपुर कार्यालय में कार्य करने के लिए आदेशित किया गया था। इसके बाद वे बिना अनुमति कर्तव्य से अनुपस्थित पाए गए। इसी आधार पर 28 मार्च 2024 को उन्हें निलंबित कर उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय उदयपुर निर्धारित किया गया था। विभागीय जांच में भूमि प्रकरण से जुड़े आरोपों के साथ उनकी अनधिकृत अनुपस्थिति को भी गंभीरता से लिया गया।
नजूल जमीन पर फिर बड़ा सवाल—रिकॉर्ड में सेंध आखिर कितनी आसान?
अंबिकापुर में नजूल भूमि से जुड़े इस प्रकरण ने एक बार फिर राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा और नामांतरण प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी जमीन किसी निजी व्यक्ति के नाम दर्ज होने के बाद उसे बेचने तक की स्थिति बन जाना केवल एक कर्मचारी की गलती मानकर समाप्त कर देने वाला विषय नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि एक सरकारी जमीन के निजी नाम पर दर्ज होने से पहले रिकॉर्ड की जांच करने वाली पूरी व्यवस्था ने क्या किया? आवेदन से लेकर नस्ती और आदेश तक जिन-जिन स्तरों से फाइल गुजरती है, वहां निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? मामले में पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर चलती रही है। इसलिए अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी। लेकिन विभागीय जांच में अजय तिवारी के खिलाफ आरोप प्रमाणित होने और अब पदावनति किए जाने से यह जरूर स्पष्ट है कि प्रशासन ने उनकी भूमिका को गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन माना है। सरकारी जमीन को निजी नाम तक पहुंचाने वाले तंत्र की पूरी कड़ी सामने आएगी या कार्रवाई सिर्फ कुछ कर्मचारियों तक सीमित रह जाएगी—यह सवाल अब भी इस पूरे नजूल प्रकरण का सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
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