रायपुर,28 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दूसरे राज्यों में पंजीकृत डॉक्टरों को बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के प्रदेश में प्रैक्टिस की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विवाद तेज हो गया है। राज्य के डॉक्टर इस फैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे स्थानीय डॉक्टरों के हित प्रभावित होंगे और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सकों के अवसर कम हो सकते हैं। विवाद के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए प्रस्तावित किया गया है। उनका कहना था कि केवल वही डॉक्टर छत्तीसगढ़ में काम कर सकेंगे, जिनका किसी दूसरे राज्य की मेडिकल काउंसिल में वैध रजिस्ट्रेशन हो और वे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में भी पंजीकृत हों। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार बिना सोच-विचार के कोई निर्णय नहीं ले रही है। उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों में पहले से इस तरह की व्यवस्था लागू है और छत्तीसगढ़ भी उसी मॉडल का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों की आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे पर जल्द ही चिकित्सकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जाएगी। डॉक्टरों की कमी का जिक्र करते हुए जायसवाल ने कहा कि सरकार लगातार नई भर्तियां कर रही है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 125 नियमित पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अब तक केवल 78 पद ही भर पाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास रिक्त पदों की कमी नहीं है,लेकिन आवेदन करने वाले योग्य डॉक्टर पर्याप्त संख्या में नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना जरूरी हो गया है। सरकार इधर, राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री रायपुर के जिला अस्पताल पहुंचे और बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि पांच वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक जरूर दिलाएं। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के स्वास्थ्य केंद्रों और पोलियो बूथों पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा इस जीवनरक्षक दवा से वंचित न रहे।
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