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अम्बिकापुर@ दुष्कर्म आरोपी पशु चिकित्सक पर कार्रवाई में देरी

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खबर प्रकाशित होते ही उप संचालक को थमाया कारण बताओ नोटिस
48 घंटे से अधिक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बावजूद निलंबन प्रस्ताव समय पर नहीं भेजने पर संचालक ने मांगा तीन दिन में जवाब
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 जून 2026 (घटती-घटना)।
दुष्कर्म के आरोपी पशु चिकित्सक पर विभागीय कार्रवाई में देरी का मामला सामने आने के बाद अब पशु चिकित्सा विभाग ने सरगुजा के प्रभारी उप संचालक डॉ. आरपी शुक्ला को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि आरोपी अधिकारी के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बावजूद नियमानुसार समय पर जानकारी और निलंबन संबंधी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा 11 जून 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि गांधीनगर थाना में डॉ. संजीवन टोप्पो के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज होने तथा 16 मई 2026 को गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था। पुलिस ने इसकी सूचना 20 मई को कार्यालय को भेज दी थी, जो 21 मई को प्राप्त हो गई थी। इसके बावजूद उप संचालक कार्यालय द्वारा इसकी जानकारी मुख्यालय को 5 जून 2026 को भेजी गई। नोटिस में कहा गया है कि यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम,1965 तथा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1966 के विपरीत है। नियमानुसार यदि कोई शासकीय सेवक 48 घंटे से अधिक न्यायिक अभिरक्षा में रहता है तो उसे निलंबित माना जाता है और इसकी तत्काल सूचना सक्षम प्राधिकारी को दी जानी चाहिए।
पहले क्या था मामला : गांधीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर डॉ. संजीवन टोप्पो के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा था। करीब डेढ़ माह बाद उन्हें जमानत मिली। इस बीच उनके निलंबन में हुई देरी को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई थी।
12 दिन के भीतर दूसरी बार नोटिस : पशुधन विकास विभाग सरगुजा के प्रभारी उपसंचालक डॉ. आरपी शुक्ला को 12 दिन के भीतर दूसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस बार मामला प्राइवेट कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं (पीएआईडब्ल्यू) के मानदेय भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, रायपुर ने तीन दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार संचालक कार्यालय ने वर्ष 2022-23 और 2023-24 के पीएआईडब्ल्यू के लंबित मानदेय की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में डॉ. शुक्ला ने दोनों वर्षों का लंबित भुगतान शून्य बताया तथा वर्ष 2024-25 के लिए 5.40 लाख रुपए की मांग भेजी। मांग के अनुरूप विभाग ने उक्त राशि आबंटित भी कर दी। आरोप है कि वर्ष 2024-25 के लिए मिली राशि में से 1.14 लाख रुपए का भुगतान वर्ष 2023-24 के कार्यों के लिए कर दिया गया, जबकि पूर्व में संबंधित अवधि का कोई भुगतान लंबित नहीं होने की जानकारी विभाग को भेजी गई थी। इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए संचालक ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1) एवं 3(2) के विपरीत माना है। इसी आधार पर 23 जून को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।


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