राम मंदिर दान की कथित चोरी दुखद और शर्मनाक,पारदर्शी जांच हो : प्रियंका गांधी
नई दिल्ली,27 जून 2026। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने राम मंदिर में दान और चंदे के गबन के मामले को अत्यंत दुःखद और शर्मनाक करार दिया है। वायनाड (केरल) में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने इस घटना को देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धापूर्वक अपना योगदान दिया था,आज उनका भरोसा टूटा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर तीखे सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि मंदिर निर्माण के नाम पर फंड जुटाया गया था, तो उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी? उन्होंने इस मामले में स्पष्ट जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है।
जनता की मेहनत की कमाई का हिसाब कौन देगा? प्रियंका गांधी ने इस मामले के भावनात्मक पहलू पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल बड़ी कॉर्पोरेट संस्थाओं द्वारा दिया गया चंदा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि देश की महिलाओं ने अपनी छोटी-छोटी बचत से और गरीबों ने अपनी मेहनत की कमाई से यह दान दिया है। जब आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई मंदिर के लिए अर्पित करता है, तो उसे सुरक्षित रखना और उसका पारदर्शी प्रबंधन करना आयोजकों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने कहा कि चंदा अभियान के दौरान जिस तरह से लोगों को प्रेरित किया गया था, अब उसी गंभीरता के साथ उन लोगों को सामने आकर जवाब देना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह सब कैसे और क्यों हुआ।
एसआईटी की कार्रवाई : अब तक क्या हुआ? राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी का यह विवाद 7 जून को प्रकाश में आया था। इस गंभीर मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को एक विशेष जांच दल का गठन किया। एसआईटी ने मामले की प्रारंभिक जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इस रिपोर्ट की सिफारिशों को आधार बनाकर 25 जून की रात को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। कार्रवाई करते हुए अयोध्या पुलिस ने शुक्रवार तक मामले में आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, ये सभी आरोपी 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं।
योगी सरकार सख्तः दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रुख पर वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि सरकार इस प्रकरण को लेकर बेहद गंभीर है। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बेहद कठोर सिफारिशें की हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और राज्य सरकार की ओर से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर ट्रस्ट की गरिमा और श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल करना अब प्रशासन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल
प्रियंका गांधी की मांग और एसआईटी की सक्रियता, दोनों ही इस बात की ओर इशारा करते हैं कि धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में पारदर्शिता कितनी अनिवार्य है। जब आम जनता अपनी श्रद्धा के कारण मंदिर के प्रति समर्पित होती है, तो उनकी ओर से दी गई धनराशि का हर एक रुपया पवित्र माना जाता है। अब देश की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उन जिम्मेदार चेहरों पर टिकी हैं जिन्होंने इस पूरे चंदा अभियान का संचालन किया था। क्या यह मात्र एक चोरी का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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