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मनेंद्रगढ़@ छत्तीसगढ़ में साकार हुआ ‘मिनी केदारनाथ’

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  • सिद्धबाबा धाम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई प्राण-प्रतिष्ठा
  • 1200 फीट ऊंचे सिद्धबाबा पहाड़ पर गूंजा ‘हर-हर महादेव’ केदारनाथ की तर्ज पर बने मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा
  • 6 वर्षों की साधना रंग लाई,मनेंद्रगढ़ के सिद्धबाबा धाम को मिला ‘मिनी केदारनाथ’ का भव्य स्वरूप
  • मनेंद्रगढ़ बना नई आस्था का केंद्र… सिद्धबाबा धाम में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न
  • 121 वर्ष पुराने सिद्धबाबा धाम का हुआ कायाकल्प,केदारनाथ की तर्ज पर बने मंदिर के खुले पट…
  • 3 करोड़ रुपये की लागत,6 वर्षों में तैयार हुआ भव्य मंदिर, ओडिशा के शिल्पकारों ने दी केदारनाथ जैसी वास्तुकला,शोभायात्रा में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल…


-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़ ,27 जून 2026 (घटती-घटना)।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सिद्धबाबा धाम में शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच नवनिर्मित शिव मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई, लगभग 1200 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित इस प्राचीन तपोस्थल को उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की तर्ज पर विकसित किया गया है, प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही यह धार्मिक स्थल अब छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल हो गया है, तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और प्रयागराज से आए साधु-संतों एवं हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
1905 से जुड़ा है सिद्धबाबा धाम का इतिहास- स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सिद्धबाबा धाम का इतिहास वर्ष 1905 से जुड़ा हुआ है, प्रारंभ में यहां एक छोटी गुफा और धूनी थी, जहां नागा साधु एवं अघोरी साधना किया करते थे, यहां स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू एवं जागृत माना जाता है, श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सिद्धबाबा के आशीर्वाद के बिना इस धाम तक पहुंचना संभव नहीं होता और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है।
मंदिर निर्माण के साथ जुड़ी जिला बनने की चर्चा- स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि फरवरी 2020 में मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ होने के कुछ समय बाद ही मनेंद्रगढ़ को नए जिले का दर्जा मिला, हालांकि यह स्थानीय आस्था एवं जनमान्यता का विषय है,जिसे श्रद्धालु सिद्धबाबा का आशीर्वाद मानते हैं।
हर वर्ष मकर संक्रांति पर लगता है विशाल मेला- सिद्धबाबा धाम में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, प्राण-प्रतिष्ठा के बाद इस धाम के धार्मिक पर्यटन के रूप में और अधिक विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सामाजिक सौहार्द की भी दिखी मिसाल- प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पूर्व मनेंद्रगढ़ नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा का विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने स्वागत किया, विशेष रूप से मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा शोभायात्रा का स्वागत किए जाने को सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल के रूप में देखा गया।
केदारनाथ की तर्ज पर तैयार हुआ भव्य मंदिर
सिद्धबाबा धाम के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण का कार्य फरवरी 2020 में प्रारंभ हुआ था, लगभग छह वर्षों तक चले निर्माण कार्य में सिद्धबाबा सेवा समिति एवं जनसहयोग से करीब तीन करोड़ रुपये व्यय किए गए, मंदिर की वास्तुकला उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर से प्रेरित है, मंदिर की नक्काशी और पत्थर की कलाकृतियों को आकार देने के लिए ओडिशा के अनुभवी शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने महीनों की मेहनत से इसे आकर्षक स्वरूप प्रदान किया।
1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है धाम
सड़क मार्ग से लगभग 1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की लंबाई लगभग 65 फीट, चौड़ाई 30 फीट तथा गर्भगृह 16 फीट का बनाया गया है, मंदिर परिसर को इस प्रकार विकसित किया गया है कि एक समय में लगभग 500 श्रद्धालु दर्शन कर सकें। हाल ही में राज्य शासन ने इस क्षेत्र को धार्मिक एवं ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पहुंच मार्ग एवं अन्य सुविधाओं हेतु 74 लाख रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति भी प्रदान की है।
एक नजर में सिद्धबाबा धाम
केदारनाथ धाम की तर्ज पर निर्मित शिव मंदिर।
लगभग 6 वर्षों में पूर्ण हुआ निर्माण कार्य।
करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से हुआ निर्माण।
1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर।
एक साथ लगभग 500 श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था।
ओडिशा के शिल्पकारों ने की पत्थरों की नक्काशी।
हर वर्ष मकर संक्रांति पर विशाल धार्मिक मेला आयोजित होता है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन ने 74 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है।


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