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बैकुण्ठपुर@ पशुपालन विभाग की शिकायतों से मचा हड़कंप!

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कोरिया पहुंची 5 सदस्यीय जांच टीम
रिपोर्ट पर हस्ताक्षर से शिकायतकर्ता ने किया इंकार,जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
पहले रिपोर्ट दिखाइए,फिर हस्ताक्षर करेंगे : शिकायतकर्ता विकास साहू
-संवाददाता-
बैकुण्ठपुर,21 जून 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले के पशुपालन विभाग में कथित अनियमितताओं,प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। लगातार शिकायतों और जनदर्शन सहित विभिन्न स्तरों पर दिए गए आवेदनों के बाद आखिरकार पांच सदस्यीय जांच दल कोरिया पहुंचा, लेकिन जांच शुरू होते ही मामला नए विवाद में घिर गया। शिकायतकर्ता विकास साहू ने जांच प्रतिवेदन की सामग्री देखे बिना हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया,जिसके बाद पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार तामडांड निवासी विकास साहू पिछले कई वर्षों से पशुपालन विभाग में कथित गड़बडि़यों, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाते हुए लगातार शिकायतें कर रहे हैं,उनका कहना है कि विभाग के खिलाफ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और तथ्यों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, यही कारण है कि उन्होंने उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
गोलमोल जवाब देकर मामले को टालने का आरोप
शिकायतकर्ता विकास साहू का आरोप है कि विभागीय अधिकारी और जांच से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी लगातार मामले को दबाने और टालने का प्रयास कर रहे हैं,उनका कहना है कि कई बार दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें न तो स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई गई,विकास साहू का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा बार-बार अलग-अलग जवाब देकर उन्हें भ्रमित करने का प्रयास किया गया, उनका कहना है कि यदि विभाग के पास शिकायतों का जवाब है तो उसे सार्वजनिक रूप से रखा जाना चाहिए ताकि शिकायतकर्ता और आम जनता भी सच्चाई जान सके।
जांच के दौरान बढ़ा विवाद
जांच के दौरान पांच सदस्यीय टीम द्वारा शिकायतकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे थे तथा दस्तावेजों की जांच की जा रही थी, इसी दौरान विवाद तब खड़ा हो गया जब शिकायतकर्ताओं को कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि उन्हें बिना पूरी जानकारी दिए हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, उनका दावा है कि जांचकर्ता अधिकारियों ने उनसे कहा कि वे हस्ताक्षर कर दें और रिपोर्ट में उनके पक्ष को दर्ज कर दिया जाएगा, हालांकि शिकायतकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक उन्हें यह नहीं बताया जाएगा कि दस्तावेज में क्या लिखा गया है और जांच प्रतिवेदन में उनकी शिकायतों के संबंध में क्या निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं, तब तक वे किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना पढ़े या समझे हस्ताक्षर करना उनके हितों के खिलाफ हो सकता है और भविष्य में इससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
जांचकर्ता अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जांच के दौरान उत्पन्न इस स्थिति ने जांचकर्ता अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला दिया है,शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है तो प्रतिवेदन या दर्ज की गई टिप्पणियों को दिखाने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए, हालांकि जांच दल की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर से इंकार करने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है,जिले में अब यह सवाल उठने लगा है कि जांच केवल औपचारिकता है या वास्तव में शिकायतों की निष्पक्ष पड़ताल की जा रही है।
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें…
सूत्रों के अनुसार जांच दल ने शिकायतकर्ता पक्ष,विभागीय अधिकारियों और संबंधित दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी एकत्र कर ली है,अब जांच प्रतिवेदन तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा,जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी,यदि जांच में शिकायतों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता,वहीं यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही साबित नहीं होते हैं तो विभाग को भी राहत मिल सकती है,फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिकायतकर्ताओं को उनकी शिकायतों का संतोषजनक जवाब मिलेगा या फिर यह जांच भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में सिमटकर रह जाएगी, कोरिया जिले में अब हर किसी की निगाह जांच दल की अंतिम रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हुई है।


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