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नई दिल्ली@शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट : व्हिप के बाद भी नहीं आए 6 लोकसभा सांसद,उद्धव गुट ने थमाया नोटिस,सदस्यता रद्द कराने की तैयारी

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नई दिल्ली,18 जून 2026। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। साल 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक टूट की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। दिल्ली में शिवसेना उद्धव गुट यानी शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की एक बेहद जरूरी बैठक बुलाई गई थी, लेकिन पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद इस बैठक से गायब रहे। गायब होने वाले सांसदों की यह संख्या कुल ताकत का दो-तिहाई हिस्सा है। इस खुली बगावत को देखते हुए उद्धव ठाकरे की पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है और सभी अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या दोबारा होने वाला है ऑपरेशन टाइगर : महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों ऑपरेशन टाइगर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें तेज हैं कि उद्धव गुट के 9 में से 7 सांसद इस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना के लगातार संपर्क में हैं और जल्द ही पाला बदल सकते हैं। इसी संभावित खतरे को भांपते हुए पार्टी ने अपने सभी सांसदों को दिल्ली स्थित संसद कार्यालय में मौजूद रहने के लिए थ्री-लाइन व्हिप यानी एक बेहद सख्त सरकारी निर्देश जारी किया था। इसके बावजूद बैठक में सिर्फ तीन लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, राजभाऊ वाजे और अनिल देसाई ही पहुंचे। इनके अलावा राज्यसभा सांसद संजय राउत भी वहां मौजूद थे।
यह गद्दारी और सोची-समझी साजिश है : बैठक खत्म होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए फायरब्रांड नेता संजय राउत का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने बागी सांसदों के इस कदम को सीधे तौर पर धोखा, बेईमानी और सोची-समझी साजिश करार दिया। राउत ने कहा कि जो भी सांसद इस बैठक में नहीं आए हैं, उन्होंने पार्टी के आदेश का खुला उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि ये बागी सांसद कल लोकसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर से मिलकर शिंदे गुट में विलय की मांग कर रहे थे। राउत ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन लोगों ने उद्धव ठाकरे के नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की है, इसलिए व्हिप का उल्लंघन करने पर इन्हें कानूनी तौर पर अयोग्य घोषित कराया जाएगा।
बागी सांसदों को थमाया गया कारण बताओ नोटिस : पार्टी के वरिष्ठ सांसद अनिल देसाई ने साफ किया है कि अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया गया है। बैठक खत्म होते ही गायब रहने वाले सभी छह सांसदों को फोन और व्हाट्सएप के जरिए कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया है। उनसे पूछा गया है कि संदेश मिलने के बाद भी वे बैठक में क्यों नहीं आए। संजय राउत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस गंदी राजनीति की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों के क्षेत्रों में जनता अब सड़कों पर उतर आई है और इस बार यह गद्दारी इन नेताओं को बहुत भारी पड़ने वाली है।


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