रायपुर,02 जून 2026। छत्तीसगढ़ में बस यात्रियों पर जल्द महंगाई का एक और बोझ पड़ सकता है। प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग अब शासन स्तर तक पहुंच गई है। इस बीच कई रूटों पर निजी बस ऑपरेटरों द्वारा यात्रियों से 200 से 400 रुपये तक अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार की ओर से अभी तक किराया वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। यात्रियों की शिकायतों और बस ऑपरेटरों की मांग के बीच अब पूरा मामला सरकार के विचाराधीन है। परिवहन विभाग और शासन स्तर पर किराया पुनरीक्षण को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
परिवहन मंत्री तक पहुंचा मामला : छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने हाल ही में परिवहन मंत्री केदार कश्यप को ज्ञापन सौंपकर बस किराए में बढ़ोतरी की मांग की थी। इसके बाद परिवहन मंत्री ने परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर पूरे मामले की समीक्षा की। बैठक में परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, उप परिवहन आयुक्त मनोज ध्रुव और कृष्णा पटेल सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने अधिकारियों को पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने बस ऑपरेटरों से मांगा प्रस्ताव : सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों की भी बैठक बुलाई है। विभाग ने प्रस्तावित किराया वृद्धि, उसके आधार और बढ़ती संचालन लागत से संबंधित जानकारी मांगी है। विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि किराया बढ़ाने की मांग कितनी व्यावहारिक और आवश्यक है।
कई रूटों पर बढ़ा किराया वसूलने की शिकायत : इधर प्रदेश के विभिन्न रूटों पर यात्रियों से पहले की तुलना में 200 से 400 रुपये तक अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि शासन की मंजूरी और आधिकारिक आदेश के बिना ही कुछ बस संचालक बढ़ा हुआ किराया ले रहे हैं। परिवहन विभाग ने भी स्वीकार किया है कि फिलहाल किराया वृद्धि को लेकर कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किया गया है।
ऐसे में बिना अंतिम सरकारी निर्णय के बढ़ा हुआ किराया वसूले जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बस ऑपरेटरों ने बताई आर्थिक मजबूरी
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के अध्यक्ष सैयद अनवर अली का कहना है कि बस ऑपरेटर मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा रहे हैं। उनके मुताबिक लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा के कारण कई रूटों पर निर्धारित किराए से भी कम दरों पर यात्रियों को सुविधा दी जाती रही है। उन्होंने कहा कि डीजल की बढ़ती कीमतें, स्पेयर पार्ट्स, वाहन मरम्मत, रखरखाव और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में मौजूदा किराए पर बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। महासंघ ने अपनी मांग सरकार के समक्ष रख दी है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। सैयद अनवर अली ने यह भी कहा कि यदि किराया पुनरीक्षण नहीं किया गया तो कई बस संचालकों के लिए परिवहन सेवा जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार कर रही संतुलन बनाने की कोशिश
मामले पर अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने कहा कि किराया पुनरीक्षण से जुड़ा प्रस्ताव शासन के विचाराधीन है और आने वाले दिनों में इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल परिवहन विभाग और राज्य सरकार पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि एक ओर बस ऑपरेटरों की आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखा जाए तो दूसरी ओर आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े। हालांकि जब तक सरकार का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक कई रूटों पर बढ़ा हुआ किराया वसूले जाने की शिकायतें प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
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